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नीमच में 30 दिवसीय थियेटर व कला कार्यशाला: अभिनय के गुर सीख रहे बच्चे; 26 जुलाई को टाउन हॉल में होगा भव्य समापन

डेस्क न्यूज़ 12 July, 2026


नीमच, 12 जुलाई 2026। शहर में बच्चों के सर्वांगीण विकास और अभिनय कला को निखारने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही 30 दिवसीय विशेष कार्यशाला इन दिनों पूरे शबाब पर है। कार्यशाला में भाग ले रहे बच्चों और युवाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है और वे सभी रचनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं। इस कार्यशाला का भव्य समापन आगामी 26 जुलाई 2026 को नीमच के टाउन हॉल में बच्चों द्वारा तैयार की गई विशेष प्रस्तुतियों के साथ होगा।

​कल्पनाशीलता और थियेटर गेम्स से संवर रही प्रतिभा
​कार्यशाला की सह-निर्देशिका और मुख्य प्रशिक्षिका सावित्री द्वारा बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से रचनात्मक बनाने के लिए कई विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है:

​चित्रकला (इमेजिनेशन): बच्चे अपनी कल्पना के आधार पर 'ड्रीम होम' (सपनों का घर) और 'ड्रीम ट्री' (सपनों का पेड़) जैसी कलाकृतियां कैनवास पर उकेर रहे हैं।
​थियेटर टूल्स: बच्चों को थियेटर गेम्स, स्टोरी टेलिंग (कहानी सुनाना), वॉयस एंड स्पीच (आवाज का उतार-चढ़ाव) और फोकस बढ़ाना सिखाया जा रहा है।
​एक्टिंग और इम्प्रोवाइजेशन: प्रशिक्षण में बच्चे 'एक्शन और रिएक्शन' (क्रिया-प्रतिक्रिया) के सिद्धांतों को समझ रहे हैं। साथ ही वे खुद कहानियां लिख रहे हैं और 'इम्प्रोवाइजेशन' (तत्काल अभिनय) के माध्यम से उन्हें मंच पर जीवंत कर रहे हैं।

​शारीरिक मूवमेंट, संगीत और नाट्यशास्त्र का अभ्यास
​कार्यशाला के निर्देशक सुशील कान्त मिश्रा द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को थियेटर के तकनीकी पक्षों से रूबरू कराया जा रहा है:
​मूवमेंट और कोरियोग्राफी: बच्चों को शारीरिक मूवमेंट्स का कड़ा अभ्यास कराया जा रहा है, साथ ही यह भी सिखाया जा रहा है कि कैसे अलग-अलग मूवमेंट्स मिलकर एक खूबसूरत कोरियोग्राफी का स्वरूप ग्रहण कर लेते हैं।
​संगीत व लेखन: कार्यशाला में संगीत के बुनियादी प्रशिक्षण के साथ-साथ खुद गाने लिखना और उन्हें धुन में पिरोना सिखाया जा रहा है।
​नाट्यशास्त्र का महत्व: निर्देशक द्वारा बच्चों को समझाया जा रहा है कि भारतीय नाट्यशास्त्र में अभिनय पर लिखे गए श्लोकों को प्रत्येक अभिनेता को अपने जीवन का मूल मंत्र मानकर निरंतर अभ्यास करना चाहिए।

​'पढ़ना-लिखना और सजग रहना ही अभिनेता की असली पूंजी'
​कार्यशाला के निर्देशक सुशील कान्त मिश्रा ने बताया कि एक अच्छे अभिनेता के लिए केवल संवाद बोलना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका पढ़ना-लिखना, जागरूक रहना और अपने शहर, परिवार व दुनिया के इतिहास से अवगत होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही साहित्य का ज्ञान और उससे संबंधित महत्वपूर्ण किताबों को पढ़ना एक कलाकार के मानसिक विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक अच्छे अभिनेता को अपने शरीर और आवाज रूपी सभी टूल्स का निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए, क्योंकि यही उसकी असली पूंजी है।

​26 जुलाई को टाउन हॉल में दिखेगा हुनर
​इस एक महीने की कड़ी मेहनत का परिणाम आगामी 26 जुलाई को देखने को मिलेगा। कार्यशाला का समापन बच्चों द्वारा खुद लिखी गई और उन्हीं के द्वारा तैयार की गई नाट्य प्रस्तुतियों के साथ टाउन हॉल, नीमच में होगा। इस भव्य मंचन के लिए बच्चे इन दिनों सुबह-शाम पूरे उत्साह के साथ निरंतर रिहर्सल और अभ्यास में जुटे हुए हैं।

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