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दतिया उपचुनाव: आशुतोष तिवारी को टिकट देने के बाद भाजपा ने फेंका ज्योतिरादित्य सिंधिया का 'ग्वालियर-चंबल' कार्ड, प्रदेश में सियासी हलचल तेज

डेस्क न्यूज़ 11 July, 2026 राजनीति


दतिया/भोपाल, 11 जुलाई 2026। दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में पल-पल समीकरण बदल रहे हैं। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने के बाद, अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने एक और बड़ा सियासी दांव चल दिया है। पार्टी की चुनावी रणनीति को अचूक धार देने के लिए अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया के रण में एक बेहद अहम और बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस नए घटनाक्रम के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल चरम पर पहुंच गई है।

सिंधिया के हाथों में होगी दतिया चुनाव अभियान की कमान
भाजपा हाईकमान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया विधानसभा उपचुनाव का मुख्य चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। ग्वालियर-चंबल अंचल में बेहद मजबूत राजनीतिक रसूख और जनता के बीच गहरी पकड़ रखने वाले सिंधिया अब दतिया में भाजपा के पूरे चुनाव अभियान का नेतृत्व करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कद्दावर चेहरे को सीधे मैदान में उतारकर भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस उपचुनाव को किसी भी कीमत पर हाथ से नहीं जाने देना चाहती। सिंधिया की देखरेख में अब पार्टी दतिया में बूथ प्रबंधन, सांगठनात्मक समन्वय और धुआंधार चुनाव प्रचार की नई रूपरेखा तैयार करेगी।

नरोत्तम का टिकट कटने के बाद भाजपा का 'मास्टरस्ट्रोक'
दतिया सीट पर मुकाबला पहले ही काफी दिलचस्प मोड़ पर आ चुका है, क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा ने कई वरिष्ठ चेहरों को दरकिनार कर संगठन के पुराने सिपाही आशुतोष तिवारी पर दांव खेला है।

इस बड़े बदलाव के बाद स्थानीय स्तर पर असंतोष न भड़के और डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) समय रहते किया जा सके, इसके लिए सिंधिया को मोर्चे पर तैनात करना भाजपा का बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। सिंधिया का ग्वालियर-चंबल के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर सीधा प्रभाव है, जो इस चुनाव में बिखराव को रोकने में मददगार साबित हो सकता है।

कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है भाजपा हाईकमान
30 जुलाई 2026 को होने वाले मतदान के लिए भाजपा फूंक-फूंककर कदम रख रही है। अनुभवी और आक्रामक नेतृत्व के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्य जिम्मेदारी देकर पार्टी ने विपक्ष को यह कड़ा संदेश दे दिया है कि वह इस सीट पर जीत को लेकर बेहद गंभीर है।

अब दतिया की जनता और पूरे मध्य प्रदेश के राजनीतिक पंडितों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सिंधिया की यह चुनावी बिसात और उनकी नई रणनीति दतिया के गढ़ में भाजपा को कितनी बड़ी सफलता दिला पाती है।

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