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मध्य प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू, 15 हजार पुलिसकर्मियों समेत हजारों कर्मचारियों की पात्रता की होगी समीक्षा

डेस्क न्यूज़ 12 July, 2026 अन्य

भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब एक दशक बाद शुरू हुई नियमित पदोन्नति प्रक्रिया के साथ ही विभिन्न विभागों में कार्यवाहक (ऑफिसिएटिंग) प्रभार संभाल रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की पात्रता की दोबारा जांच शुरू हो गई है। नई पदोन्नति प्रक्रिया के तहत वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (ACR), विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण, न्यायालयीन मामलों तथा अन्य निर्धारित मापदंडों के आधार पर पात्रता का परीक्षण किया जाएगा। यह प्रक्रिया मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच लंबित है, जिनकी एसीआर प्रतिकूल है अथवा जो अन्य निर्धारित शर्तों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें नियमित पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में वर्तमान में दिए गए कार्यवाहक प्रभार की भी समीक्षा की जा सकती है।

वर्ष 2016 से प्रदेश में नियमित पदोन्नतियां कानूनी विवादों के कारण प्रभावित थीं। इसके बाद वर्ष 2021 में विभिन्न विभागों में प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसलिए बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च पदों का कार्यवाहक प्रभार सौंपा गया था। अब नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के साथ उन सभी मामलों का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि पुलिस, राजस्व, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, सहकारिता सहित कई विभाग इस समीक्षा प्रक्रिया के दायरे में हैं। पुलिस विभाग में आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक करीब 15 हजार कर्मचारियों को पूर्व में कार्यवाहक प्रभार दिया गया था, जिनकी पात्रता का परीक्षण किया जा रहा है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, बल्कि प्रत्येक मामले का परीक्षण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।

इधर, नई पदोन्नति नियमावली को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती भी लंबित है। हाल ही में याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया के बीच पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। ऐसे में पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

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