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दतिया में BJP में बवाल ! टिकट बदलते ही हाईवे जाम, पथराव के बाद धारा 163 लागू, पुलिस से झड़प में एसपी समेत 8 पुलिसकर्मी घायल

डेस्क न्यूज़ 11 July, 2026 अन्य

दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया में भाजपा प्रत्याशी बदलने के फैसले के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद समर्थकों का विरोध उग्र हो गया।

शुक्रवार शाम से शुरू हुआ प्रदर्शन शनिवार तड़के हिंसक रूप ले बैठा। नाराज कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर-झांसी हाईवे पर करीब 15 से 20 किलोमीटर लंबा चक्काजाम कर दिया। हालात बिगड़ने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। पथराव में कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और एक वाहन पलट गया।

शनिवार सुबह करीब 4:30 बजे हुए पथराव में एसपी, एसडीओपी समेत 8 पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहीं, नरोत्तम मिश्रा के कुछ समर्थकों के घायल होने की भी सूचना है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया। दतिया स्थित भाजपा कार्यालय में करीब 250 कार्यकर्ताओं को एहतियातन अंदर ही रोक दिया गया, जबकि पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई।

विरोध प्रदर्शन में 500 से अधिक भाजपा कार्यकर्ता रातभर हाईवे पर डटे रहे। डबरा के हरिपुर तिराहे पर भी चक्काजाम किया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया और भाजपा कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की।

राजनीतिक विरोध का असर संगठन पर भी दिखाई दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण समेत कई पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। नगर मंत्री, भाजपा कोषाध्यक्ष और कई पार्षदों के भी इस्तीफा देने का दावा किया जा रहा है।

बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। आदेश के तहत बिना अनुमति किसी भी सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक आयोजन पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर भी रोक लगा दी गई है।

गौरतलब है कि 30 जुलाई को दतिया विधानसभा उपचुनाव होना है। उपचुनाव की घोषणा के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार चुनावी तैयारियों में जुटे थे और नामांकन फॉर्म भी खरीद चुके थे, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसी फैसले के बाद भाजपा के भीतर विरोध खुलकर सामने आ गया है।

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