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लेट फीस के नाम पर निजी स्कूल पर भारी वसूली का आरोप, पीड़ित पिता बच्चों की रसीदें लेकर पहुंचा कलेक्ट्रेट जनसुनवाई; जांच के आदेश

डेस्क न्यूज़ 07 July, 2026

नीमच। शहर के एक निजी विद्यालय 'क्रिएटिव माइंड्स ग्लोबल स्कूल' में लेट फीस और फाइन के नाम पर मनमानी राशि वसूलने का एक गंभीर मामला मंगलवार को कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में गूंजा। पीड़ित अभिभावक अपने दोनों बच्चों की पिछले कई वर्षों की फीस रसीदें लेकर सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ अवैध आर्थिक शोषण की लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं।

मजबूरी का उठाया फायदा, मूल फीस के बराबर वसूला जुर्माना: जनसुनवाई में आवेदन देने पहुंचे पीड़ित अभिभावक ललित गुर्जर ने बताया कि उनके दो बच्चे एडमिशन नंबर 620 और एडमिशन नंबर 619 पिछले 5 वर्षों से इसी स्कूल में लगातार पढ़ रहे थे। मार्च में स्कूल द्वारा दोनों बच्चों की टीसी जारी की गई।

ललित गुर्जर का आरोप है कि, "व्यवसायिक कारणों या किन्हीं मजबूरियों के चलते जब भी फीस जमा करने में कुछ दिनों की देरी होती थी, स्कूल प्रबंधन द्वारा मनमाने तरीके से हजारों रुपये लेट फीस और फाइन थोप दिया जाता था। मेरे एक बच्चे की रसीद में महज ₹510 की बची हुई ट्यूशन फीस पर ₹490 का लेट फीस फाइन (करीब 96% जुर्माना) वसूल लिया गया। वहीं दूसरे बच्चे की एक तिमाही की देरी पर ₹1,020 और ₹3,260 तक के भारी-भरकम जुर्माने वसूले गए। कुल लेट फीस देखें तो लगभग 12-13 हजार रुपये fine और late fee के नामा पर वसूले गए. उनका कहना है कि कंप्यूटर बिलिंग और अकाउंट्स लेज़र में भारी विसंगतियां हैं। यह शिक्षा के नाम पर खुली लूट और अभिभावकों का मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न है।"

स्कूल प्रबंधन का तर्क: लगातार लेट-लतीफी के कारण नियमानुसार लगा फाइन
इधर, इस पूरे विवाद पर स्कूल प्रबंधक विकास मदनानी का कहना है कि, “छात्र उनके स्कूल में कई  वर्षों से लगातार पढ़ रहे थे और इसी साल मार्च में नियमानुसार टीसी दी गई है”। प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि, "छात्र के अभिभावक द्वारा हर वर्ष, हर सत्र में फीस जमा करने में अत्यधिक लेट-लतीफी (महीनों की देरी) की जाती रही है। स्कूल की एक तय फीस पॉलिसी और समय-सीमा होती है, उसी नियमानुसार शुल्क लिया गया है। इसमें कोई मनमानी नहीं की गई है।"

रसीदों देखने से पता चलता है कि कहीं मामूली बकाया राशि पर 96% तक जुर्माना है, तो कहीं मात्र 8 दिनों के अंतराल में ही ट्यूशन फीस के गणित को बदल दिया गया है।
अभिभावक ने मांग की है कि स्कूल के पिछले 5 सालों के संपूर्ण अकाउंट्स लेज़र की निष्पक्ष जांच कराई जाए और लेट फीस के नाम पर वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस दिलाई जाए।

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