भोपाल/दतिया, 10 जुलाई 2026। मध्य प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार दतिया विधानसभा उप-चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने एक बार फिर चौंकाने वाला फैसला लिया है。 भाजपा केंद्रीय कार्यालय द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दतिया विधानसभा उपचुनाव (सीट क्रमांक-22) के लिए आशुतोष तिवारी को पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया गया है।
इस घोषणा के साथ ही क्षेत्र के कद्दावर नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की उपचुनाव लड़कर मुख्यधारा की राजनीति में वापसी की लालसा को बड़ा झटका लगा है। नरोत्तम मिश्रा, जो हाल ही में नामांकन पत्र खरीदकर चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके थे, उन्हें दरकिनार कर पार्टी ने संगठन के पुराने चेहरे आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है।
नरोत्तम मिश्रा की चुनावी लालसा और तैयारियों पर फिरा पानी
साल 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा दतिया में लगातार सक्रिय थे और इस उपचुनाव को अपनी सियासी वापसी के बड़े मौके के रूप में देख रहे थे।
- नामांकन की थी तैयारी: राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को ही उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र (नॉमिनेशन फॉर्म) खरीद लिया था और शुक्रवार को वे अपना पर्चा दाखिल करने वाले थे।
- अचानक बदला समीकरण: ऐन वक्त पर केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा आशुतोष तिवारी का नाम फाइनल किए जाने से नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में मायूसी छा गई है।
टिकट कटने के पीछे के ३ बड़े कारण:
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा हाईकमान द्वारा नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के पीछे निम्नलिखित रणनीतिक कारण माने जा रहे हैं:
- 2023 की हार का घाव और सर्वे रिपोर्ट: पार्टी नेतृत्व साल 2023 के चुनाव में मिली हार को भूला नहीं है。 आंतरिक सर्वे रिपोर्टों में यह बात सामने आई थी कि नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी (सत्तारूढ़ विरोधी लहर) का असर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, जिसके चलते पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थी।
- नए नेतृत्व और संगठन को तरजीह: भाजपा इस समय मध्य प्रदेश सहित देश भर में पीढ़ीगत बदलाव (Generational Shift) और नए चेहरों को आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। आशुतोष तिवारी भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री रह चुके हैं और मध्य Pradesh हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन के रूप में उनकी छवि साफ-सुथरी और एक कर्मठ कार्यकर्ता की रही है।
- कांग्रेस के गढ़ में 'लोकल' कार्ड: नरोत्तम मिश्रा को भारी नेता के रूप में घेरे जाने की रणनीति से बचने के लिए भी पार्टी ने दतिया क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखने वाले स्थानीय और सांगठनिक चेहरे को तरजीह दी है।
क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव?
दतिया की यह विधानसभा सीट कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के कारण खाली हुई है。 साल 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी।
लेकिन, अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने राजेंद्र भारती को कोऑपरेटिव बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले में 3 साल की कैद की सजा सुना दी। नियमों के मुताबिक, सजा का ऐलान होते ही विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी, जिसके कारण निर्वाचन आयोग को यहां 30 जुलाई 2026 को उपचुनाव कराने का फैसला लेना पड़ा। आज ही मध्य प्रदेश के दतिया से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने बैंक फ्रॉड मामले में उनकी अपील खारिज कर दी और दोषसिद्धि को चुनौती देने की मांग पर राहत नहीं दी। इस मामले में उन्हें पहले ही 3 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसके बाद उनकी विधायकी भी चली गई थी।
कौन हैं भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी?
आशुतोष तिवारी मध्य प्रदेश भाजपा का एक जाना-माना सांगठनिक चेहरा हैं। वे पूर्व में संभागीय संगठन मंत्री के रूप में जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत कर चुके हैं। इसके अलावा वे मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। साल 2023 के आम चुनाव में भी उन्होंने दतिया से अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन तब पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा को ही मैदान में उतारा था। इस बार संगठन ने उनकी पुरानी मेहनत का इनाम देते हुए उन्हें दतिया के इस बड़े सियासी दंगल में उतारा है।
अब टिकी हैं कांग्रेस पर निगाहें:
भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी के नाम के ऐलान के बाद अब दतिया का यह मुकाबला बेहद रोचक हो गया है अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस सीट को बचाने के लिए राजेंद्र भारती के किसी करीबी या किस नए चेहरे पर दांव खेलती है। दतिया में 30 जुलाई को मतदान होना है और 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही साफ होगा कि दतिया का नया सरताज कौन बनेगा।