डेस्क न्यूज़
12 July, 2026
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नीमच। सनातन धर्म की अलौकिक छटा, वैदिक मंत्रों की गूंज, संतों का सान्निध्य और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था... नीमच का टाउन हॉल रविवार को आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया। निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर एवं आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन से श्रद्धालुओं को सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, परिवार, संस्कार और राष्ट्रधर्म का संदेश दिया। उनके विचारों ने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म किसी एक वर्ग, जाति या समुदाय का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का शाश्वत मार्ग है। उन्होंने वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पहले ऐसा जीवन दर्शन दिया, जो आज भी पूरी दुनिया को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब समाज शास्त्रों से दूर होता है, तब भ्रम, विभाजन और संघर्ष बढ़ते हैं। लेकिन जब समाज संतों और शास्त्रों के मार्गदर्शन में चलता है, तब संस्कार, संस्कृति और सामाजिक एकता मजबूत होती है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी स्वार्थ के अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
रामायण का उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने कहा कि परिवार ही संस्कारों की पहली पाठशाला है। यदि परिवार मजबूत होगा तो समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त होंगे। वहीं महाभारत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, धर्म और सत्य का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि अंततः विजय सत्य की ही होती है।
उपनिषदों के आत्मज्ञान पर प्रकाश डालते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि मनुष्य बाहरी सुखों की तलाश में जीवन गुजार देता है, जबकि वास्तविक शांति और ईश्वर का अनुभव उसके अपने अंतर्मन में ही है। आत्मचिंतन और ईश्वर चिंतन ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझने का मार्ग है।
सावन मास की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना केवल जलाभिषेक तक सीमित नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचार, व्यवहार और आचरण को भी पवित्र बनाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्य, सेवा, संयम और संस्कार सनातन जीवन पद्धति के चार मजबूत स्तंभ हैं और यदि समाज इन मूल्यों को अपनाए तो परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों समृद्ध होंगे।
स्वामी जी के प्रवचन के बाद मध्यप्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि "पूज्य स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के मात्र आधे घंटे के प्रवचन ने मानो गंगा बहा दी। सनातन था, सनातन है और सनातन हमेशा रहेगा। आज पूरी दुनिया अशांति और संघर्ष से जूझ रही है, ऐसे समय में केवल सनातन धर्म ही विश्व को शांति का मार्ग दिखा सकता है।"
उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन धर्म पर उंगली उठाते हैं, उन्हें पहले अपनी सोच और अपनी औकात का आकलन करना चाहिए। उन्होंने टाउन हॉल में घंटों तक अनुशासन के साथ बैठे हजारों श्रद्धालुओं की सराहना करते हुए कहा कि "इतना धैर्य, श्रद्धा और अनुशासन बहुत कम देखने को मिलता है। नीमच की जनता ने अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है।"
कैलाश विजयवर्गीय ने अपने स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि कमर में चोट होने के कारण चिकित्सकों ने उन्हें यात्रा से मना किया था, लेकिन संतों की वाणी सुनने की इच्छा उन्हें नीमच ले आई। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "जैसे ही पूज्य स्वामी जी का प्रवचन सुना, मेरा दर्द भी कम हो गया।"
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने मंच से "ॐ नमः शिवाय... हर-हर महादेव..." का भजन गाया। पूरा टाउन हॉल शिवभक्ति के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भी भक्ति में सराबोर हो गए।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्रपुरी महाराज, परमहंस बावा कालीदास कृष्णानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी मधुसूदनानंद गिरी महाराज, बालमुकुंदाचार्य महाराज सहित देशभर से आए अनेक संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही। वैदिक मंत्रोच्चार, संतों के सान्निध्य और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे आयोजन को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक महाकुंभ का स्वरूप दे दिया।
नीमच से पूज्य स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज का संदेश स्पष्ट था— "शास्त्रों से जुड़िए, संस्कारों को अपनाइए, शिव तत्व को जीवन में उतारिए और सनातन संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाइए। यही मानव जीवन का वास्तविक मार्ग है।"