कपिलसिंह चौहान
15 June, 2026
द वॉचमैन पोस्ट
नीमच, 15 जून 2026। (कपिल सिंह चौहान) डिजिटल इंडिया और पढ़ेगा इंडिया के दौर में नीमच के विकास नगर (14/2) क्षेत्र से ज्ञान की एक ऐसी 'अधोसंरचनात्मक' गंगा बह रही है, जिसे देखकर बड़े-बड़े नगर नियोजक भी अपना सिर पकड़ लें। आम तौर पर लोग अपनी दुकान के अंदर किताबें बेचते हैं, लेकिन नीमच के एक परम उत्साही और परम ज्ञानी पुस्तक विक्रेता ने सोचा कि जब तक जनता को सड़क रोककर ज्ञान न परोसा जाए, तब तक असली साक्षरता आ ही नहीं सकती!
नतीजा देखना हो तो टीवीएस चौराहे से ग्वालटोली को जाने वाली मुख्य सड़क पर चले आइए। जैसा कि तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है, निरोग धाम हॉस्पिटल से कुछ ही दूरी पर इस पुस्तक विक्रेता महाशय ने अपने निजी 'व्यावसायिक लाभ' के लिए किसी शादी-ब्याह की तरह सड़क के एक बड़े हिस्से पर बकायदा 24 घंटे सातों दिन (24x7) वाला आलीशान तंबू-टेंट तान दिया है।
सड़क पर बुक फेयर: 'रॉन्ग साइड' चलिए, रोमांच पाइए!
इस 'सड़क छाप' बुक फेयर का सबसे ज्यादा लाभ उन वाहन चालकों को मिल रहा है, जिन्हें अब अपनी जान जोखिम में डालकर एडवेंचर करने का मौका मिल रहा है। बीच सड़क पर खड़े इस विशालकाय तंबू के कारण मुख्य मार्ग का पूरा एक हिस्सा पूरी तरह ठप हो चुका है। अब ग्वालटोली की तरफ जाने वाले वाहनों और ऑटो रिक्शा को मजबूरीवश रॉन्ग साइड पर आना पड़ रहा है।
निरोग धाम हॉस्पिटल के पास होने के कारण मरीजों को लाने-ले जाने वाली गाड़ियों के लिए भी यह तंबू किसी अभेद्य किले से कम नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि:
"अगर आपको सुरक्षित निकलना है, तो ट्रैफिक नियमों की किताबें खरीदिए और उसी तंबू के सामने रॉन्ग साइड से गाड़ी निकालकर अपनी किस्मत को आजमाइए।"
चार दिन से जिम्मेदार नींद में या साहित्य प्रेम में लीन?
कमाल की बात यह है कि यह तंबू-तामझाम कोई दो-चार घंटे की अनुमति लेकर नहीं लगाया गया। विगत 4 दिनों से यह तंबू सीना ताने मुख्य मार्ग पर खड़ा है। नगर पालिका और यातायात अमले की 'सजगता' का आलम यह है कि उन्हें आधी सड़क गायब हो जाने का अहसास तक नहीं हुआ है। शायद जिम्मेदार अधिकारी इस बुक फेयर से 'प्रशासनिक प्रबंधन' की कोई रहस्यमयी किताब पढ़ने में व्यस्त हैं।
सड़कें जनता के चलने के लिए होती हैं या किसी के पर्सनल बिजनेस का टेंट हाउस सजाने के लिए, यह सवाल आज हर वो राहगीर पूछ रहा है जिसे इस मार्ग से गुजरते वक्त रॉन्ग साइड जाने का 'पाप' करना पड़ रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन का बुलडोजर और जुर्माना तंत्र सिर्फ गरीब हाथ-ठेले वालों पर ही चलता है या बीच सड़क पर तंबू गाड़कर बैठे इस 'महान साहित्य प्रेमी' के व्यावसायिक अतिक्रमण पर भी कोई कार्रवाई करने की जहमत उठाता है!