डेस्क न्यूज़
16 June, 2026
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भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को ऊर्जा के क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में राज्य सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के बीच महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत प्रदेश में एग्रीवोल्टाइक (कृषि-सौर ऊर्जा) मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। इस मॉडल में किसान अपनी कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा उत्पादन भी कर सकेंगे। खेतों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जबकि नीचे कृषि कार्य जारी रहेगा। इससे किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा।
जर्मनी की प्रतिष्ठित संस्था जीआईजै़ड (GIZ) इस परियोजना के तकनीकी और नीतिगत विकास में राज्य सरकार का सहयोग करेगी। यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के अनुरूप किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग की दक्षता सुधारने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगी।
किसानों को मिलेगा दोहरा लाभ
सरकार किसानों को एग्री सौर पीवी परियोजनाओं के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराएगी। किसान अपनी जमीन के स्वामित्व को बरकरार रखते हुए खेती भी करेंगे और उसी भूमि पर सौर ऊर्जा उत्पादन कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकेंगे। इससे कृषि उत्पादकता प्रभावित हुए बिना आय में वृद्धि संभव होगी।
जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे आयोजित
एमओयू के तहत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), ऊर्जा विकासकर्ताओं, डिस्कॉम और अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। साथ ही कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखते हुए राज्य के लिए उपयुक्त नीतिगत एवं नियामक ढांचा विकसित करने में भी सहयोग दिया जाएगा।
यह समझौता वर्ष 2030 तक प्रभावी रहेगा और प्रदेश में कृषि एवं ऊर्जा क्षेत्र के समन्वित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।