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फर्जी मेडिकल दस्तावेज बनाकर अंतरिम जमानत बढ़ाने की साजिश नाकाम, 3 आरोपियों को 7-7 साल की सजा

द वॉचमैन पोस्ट 25 July, 2026 अपराध

मनासा/नीमच | अंतरिम जमानत की अवधि बढ़वाने के लिए फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत करने के मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, मनासा ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय ने दो आरोपियों को विभिन्न धाराओं में 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।

अभियोजन के अनुसार, अमरलाल पिता मथुरालाल मालवीय (55) एवं उसके पुत्र दीपक मालवीय (37) निवासी ग्राम बर्डिया, तहसील मनासा ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़वाने के लिए फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार करवाकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में प्रस्तुत किए। जांच में सामने आया कि दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे।

ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज

एनडीपीएस के एक प्रकरण में आरोपी अमरलाल न्यायिक अभिरक्षा में था। पत्नी के इलाज के आधार पर उसे एक माह की अंतरिम जमानत मिली थी। बाद में उसने पैर में एसीएल टीयर और फ्रैक्चर होने का हवाला देते हुए मालू हॉस्पिटल, भीलवाड़ा के कथित मेडिकल दस्तावेज, चिकित्सीय प्रमाण-पत्र, प्लास्टर लगी तस्वीरें तथा पुत्र का शपथ-पत्र हाईकोर्ट में पेश कर जमानत बढ़ाने का आवेदन दिया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दस्तावेजों के सत्यापन के आदेश दिए। जांच में सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए, जिसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर थाना मनासा में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

₹10 हजार में तैयार कराए थे फर्जी दस्तावेज

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि अमरलाल और उसके पुत्र दीपक ने जेल वापस जाने से बचने के उद्देश्य से भीलवाड़ा (राजस्थान) निवासी रोहित पिता बैजनाथ यादव (33), जो मालू हॉस्पिटल के नर्सिंग स्टाफ से जुड़ा कर्मचारी था, से ₹10 हजार देकर फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार करवाए थे। इसके बाद रोहित यादव को भी गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में चालान पेश किया गया।

न्यायालय ने सुनाई यह सजा

न्यायालय ने अमरलाल और दीपक मालवीय को:

  • धारा 420 आईपीसी में 5-5 वर्ष का सश्रम कारावास व ₹1,000-₹1,000 अर्थदंड।
  • धारा 467, 468, 471 एवं 120-बी आईपीसी में 7-7 वर्ष का सश्रम कारावास व ₹1,000-₹1,000 अर्थदंड।

वहीं आरोपी रोहित यादव को:

  • धारा 420 आईपीसी में 5 वर्ष का सश्रम कारावास व ₹1,000 अर्थदंड।
  • धारा 467 एवं 468 आईपीसी में 7 वर्ष का सश्रम कारावास तथा ₹1,000-₹1,000 अर्थदंड से दंडित किया गया।

अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक गुलाबसिंह चंद्रावत ने प्रभावी पैरवी करते हुए सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी एवं सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रितेश कुमार सोमपुरा ने मामले की जानकारी दी।

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