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बिना सूचना नीमच छात्रावास से दो दिन गायब रही छात्रा, पुलिस की मुस्तैदी से गुजरात में मिली, अब सुरक्षा व्यवस्था कठघरे में... आखिर जिम्मेदार कौन?

द वॉचमैन पोस्ट 24 July, 2026

नीमच | शहर के नीमच सिटी रोड स्थित सीनियर कन्या छात्रावास से कक्षा 11 की एक छात्रा के दो दिन तक लापता रहने की घटना ने छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है। राहत की बात यह रही कि छात्रा सुरक्षित मिल गई, लेकिन उससे बड़ा सवाल यह है कि एक सरकारी छात्रावास से रहने वाली छात्रा बिना किसी सूचना के बाहर कैसे चली गई? वह नीमच से गुजरात के बड़ौदा तक पहुंच गई और दो दिन तक किसी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

यह मामला केवल एक छात्रा के मिलने भर का नहीं है, बल्कि उन व्यवस्थाओं पर सवाल है जिन्हें छात्राओं की सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है।

दो दिन तक सिस्टम को नहीं लगी भनक
झाबुआ जिले की रहने वाली बालिग छात्रा नीमच में रहकर शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 11 की पढ़ाई कर रही है। वह सीनियर कन्या छात्रावास में रहती थी। जब छात्रा देर शाम तक छात्रावास नहीं लौटी तो हड़कंप मच गया। इसके बाद 21.07.2026 को केंट थाना में अधीक्षिका ज्योति यादव द्वारा गुमशुदगी दर्ज कराई गई। पुलिस ने परिजनों के सहयोग से तलाश शुरू की और दो दिन बाद छात्रा को सुरक्षित बरामद कर लिया। पुलिस के अनुसार छात्रा ने अपने बयान में बताया कि वह अपने एक परिचित से मिलने बड़ौदा चली गई थी। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया।

 

सबसे बड़ा सवाल आखिर छात्रावास से बाहर कैसे निकल गई छात्रा?
घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रावास से छात्रा कब निकली?
क्या निकलते समय किसी रजिस्टर में एंट्री हुई?
क्या वार्डन या अधीक्षिका को इसकी जानकारी थी?
रात की उपस्थिति जांच (रोल कॉल) कब हुई?
छात्रा के नहीं मिलने की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों और परिजनों तक क्यों नहीं पहुंची?
क्या छात्रावासों में सुरक्षा और निगरानी केवल कागजों तक सीमित है?
यदि छात्रा किसी दुर्घटना या अपराध का शिकार हो जाती, तो इसकी जवाबदेही कौन तय करता? यही प्रश्न अब पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है।

अधीक्षिका को कारण बताओ नोटिस
घटना को गंभीर मानते हुए आदिम जाति कल्याण विभाग ने छात्रावास अधीक्षिका ज्योति यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है कि छात्रा बिना सूचना छात्रावास से कैसे बाहर चली गई और निगरानी में यह चूक क्यों हुई।

 लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी

आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक मनोज लुथारिया ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। अधीक्षिका से जवाब मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही जिले के सभी छात्रावास अधीक्षकों की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सुरक्षा, उपस्थिति, आवागमन और अनुशासन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे। बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

यह सिर्फ एक घटना नहीं, पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी
छात्रा का सुरक्षित मिल जाना राहत जरूर है, लेकिन इस घटना ने यह संकेत भी दिया है कि यदि निगरानी व्यवस्था समय पर सक्रिय नहीं हो तो सरकारी छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा गंभीर जोखिम में पड़ सकती है। अब सवाल केवल एक नोटिस का नहीं, बल्कि यह है कि क्या जिले के सभी छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट होगा? क्या प्रवेश-निकास, उपस्थिति और निगरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत किया जाएगा? या फिर मामला कुछ दिनों बाद फाइलों में दब जाएगा? इस घटना ने साफ कर दिया है कि छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।

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