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चंगेरा मंडी में संग्राम: प्रशासन और किसानों ने तुलाई व्यवस्था को किसानो के लाभ की बताया, विरोध में हम्मालों की हड़ताल ; इधर किसानों के बजाए हम्मालों के समर्थन में उतरी कांग्रेस !

डेस्क न्यूज़ 21 July, 2026


नीमच 21 जुलाई 2026। जिले की सुप्रसिद्ध चंगेरा कृषि उपज मंडी मंगलवार को अचानक गतिरोध और आंदोलन की भेंट चढ़ गई। हम्मालों के अनुसार मंडी बोर्ड द्वारा आगामी 1 अगस्त से लागू की जा रही 'नई तुलाई एवं नीलामी व्यवस्था' के विरोध में हम्मालों ने मोर्चा खोलते हुए सोयाबीन, राईड़ा और मक्का की तुलाई पूरी तरह बंद कर दी। हम्मालों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते मंडी में सैकड़ों ट्रॉलियों का चक्का जाम हो गया। भीषण गर्मी में अपनी उपज बेचने आए किसानों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हुआ, जिससे मंडी परिसर में भारी तनाव हो गया । नुकसान की आशंका में हम्मालों ने प्रदर्शन  किया, लेकिन प्रशासन और किसानों ने जहां तुलाई व्यवस्था को किसानो के लिए लाभकारी बताया वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती मंडी में पहुँच कर हम्मालों का समर्थन किया।    

क्यों भड़का हम्मालों का गुस्सा?
कृषि उपज मंदी में प्रदर्शनकारी हम्मालों ने आरोप लगाया कि ट्रॉलियों में सीधी तुलाई से पारंपरिक व्यवस्था खत्म होगी और सैकड़ों हम्माल परिवारों की मजदूरी व रोजगार पर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि निर्णय से पहले उनसे कोई संवाद नहीं किया गया। हम्मालों ने चेतावनी देते हुए कहा कि, "जब तक प्रशासन नई व्यवस्था पर लिखित रूप से रोक नहीं लगाता या मांगें स्वीकार नहीं करता, तब तक एक भी बोरी की तुलाई नहीं होने दी जाएगी।"

मंडी सचिव का बड़ा खुलासा- "ट्रॉली तुलाई से किसानों को हर बोरी पर 20 से ₹22 का सीधा फायदा"
मंडी में उपजे भ्रम और विवाद पर मंडी सचिव उमेश बसेड़िया ने प्रशासनिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की। द वॉचमैन पोस्ट से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि किसानों के हित में 2020 से लागू है। नीमच मंडी में पहले से ही गेहूं, लहसुन व अन्य जिंसों की तुलाई ट्रॉली में ही हो रही है, जिससे किसानों को हर बोरी पर 20 से 22 रुपये का सीधा आर्थिक फायदा होता है। व्यवस्था और तैयारीयों के साथ धीरे-धीरे इसमें नई जिंसो जैसे सोयाबीन, मक्का, रायड़ा और प्याज को भी जोड़ा जा रहा है।

छोटे किसानों का भ्रम दूर किया: उन्होंने स्पष्ट किया कि 2-4 बोरी माल लाने वाले छोटे किसानों का माल पहले की ही तरह हम्मालों द्वारा ही तोला जाएगा, इसमें किसी को भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है। किसान संघ को भी इसकी जानकारी पूर्व में दी जा चुकी है। यह फैसला शासन और मंडी बोर्ड का अधिकृत आदेश है, जिससे पीछे नहीं हटा जाएगा। उन्होंने कहा कि कतिपय लोग हम्मालो और किसानों को भ्रम्नित कर रहे हैं।    

किसानों की जुबानी: "ट्रॉली तुलाई में फायदा, हम्माल ले रहे ज्यादा पैसे"
इधर किसानों ने खुलकर ट्रॉली तुलाई का समर्थन किया और अपनी बात रखी:
किसान नरवर सिंह: "ट्रॉली में किसानों को भारी फायदा है। 20 क्विंटल सोयाबीन पर तौल कांटे के मात्र ₹50 लगेंगे। वहीं अगर नीचे ढेर किया, तो ₹12 दाग के, ₹300 ऊपर के देने पड़ते हैं और व्यापारी भी ₹180 काटता है।"

किसान कमल सिंह जाट ने कहा कि "ट्रॉली में तौल की सबसे अच्छी व्यवस्था है, इससे किसानों का पैसा बचता है। हम्माल बहुत ज्यादा पैसे ले रहे हैं।"
किसान शिव गुर्जर ने बताया कि "माल ट्रॉली और खुले दोनों तरह से बिकना चाहिए। ज्यादा माल वाला ट्रॉली में बेचे और कम माल वाला खुले में बेचे।"

राजनीतिक मोड़: हम्मालों के पक्ष में उतरी कांग्रेस !  
जहां एक तरफ प्रशासन और किसानों द्वारा इस तुलाई व्यवस्था को किसानों के हित में बताया जा रहा है, साथ ही किसान भी इस व्यवस्था को खुद के लिए लाभकारी बता रहे हैं वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती इस मामले में किसानो के बजाए हम्मालों की हड़ताल का समर्थन करने पहुंचे। भले ही वे किसानो और हम्मालों के हित के लिए मध्यम मार्ग निकालने की बात कर रहे हैं लेकिन उन्होंने आंदोलनरत हम्मालों की मांगों का खुला समर्थन कर दिया । उन्होंने सरकार के इस निर्णय को तुगलकी आदेश बताते हुए कहा कि विधायक के तौल कांटो को लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह का निर्णय लिया जा रहा है। बाहेती ने प्रशासन से जिद छोड़कर मध्यम मार्ग निकालने की मांग की, जिससे किसानों और हम्मालों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।

हालांकि कई घंटो तक हम्माल अपनी हड़ताल पर अड़े रहे, पर खबर लिखे जाने तक सुचना आई की सोयाबीन की तुलाई शुरू हो चुकी थी और व्यापार सामान्य रूप से चालु हो चुका था। मंडी प्रशासन का कहना है कि 29 जुलाई को इस हेतु सभी पक्षों से पुनः बैठक कर बातचीत की जाएगी और स्थिती स्पष्ट की जाएगी ।

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