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'लोकतंत्र में बर्दाश्त नहीं'— छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का बड़ा बयान

द वॉचमैन पोस्ट 23 July, 2026 राजनीति

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च के दौरान स्टूडेंट्स पर हुए कथित लाठीचार्ज पर नाराजगी जताई है। एसोसिएशन ने लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बहुत ज्यादा और बेहिसाब बल का इस्तेमाल किया गया है। यह एक परेशान करने वाला है और लोकतांत्रिक समाज में बिल्कुल भी मंजूर नहीं है। एसोसिएशन ने बिना किसी भेदभाव के तुरंत जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। 

एसोसिएशन की तरफ से जारी बयान के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बेगुनाह स्टूडेंट्स पर हुए बेरहमी से लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करता है, जिससे कई स्टूडेंट्स को गंभीर चोटें आईं। इस घटना में SCBA के मेंबर्स समेत लीगल फ्रेटरनिटी के मेंबर्स भी घायल हुए। SCBA संबंधित अधिकारियों से इस घटना की तुरंत बिना किसी भेदभाव के और समय पर जांच करने, ज्यादा बल इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और कानून के मुताबिक सही कार्रवाई करने की अपील करता है। 
बयान में आगे कहा गया, ''SCBA आगे अधिकारियों से सभी घायल स्टूडेंट्स और लीगल फ्रेटरनिटी के मेंबर्स के लिए सही मेडिकल इलाज और मदद पक्का करने और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील करता है। एसोसिएशन उन सभी घायलों के साथ खड़ी है और संवैधानिक अधिकारों, इंसानी इज्जत और कानून के राज की रक्षा करने का अपना वादा दोहराती है।'' 

सोमवार को मॉनसून सेशन के पहले दिन संसद तक मार्च करने के लिए दिल्ली में जमा हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के हजारों समर्थकों को तितर-बितर करने के लिए पुलिसकर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस दौरान, कई वीडियोज सामने आए जिसमें पुलिस पर लाठीचार्ज करने का भी आरोप लगा। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और डंडों का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर युवा थे। ये लोग मेडिकल कॉलेजों के लिए नेशनल एंट्रेंस टेस्ट NEET में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पर चलो संसद मार्च के लिए जमा हुए थे। 
पुलिसवालों को भी आईं चोटें
वहीं, इस पूरे मार्च में कुछ पुलिसवालों को भी चोटें आईं। सूत्रों के अनुसार, घायल होने वालों की संख्या 50 के आसपास थी। इस प्रोटेस्ट के समय हजारों की संख्या में युवा दिल्ली की सड़कों पर थे। बड़ी संख्या में युवा तो संसद के करीब तक पहुंचने वाले थे, जिसकी वजह से बिल्डिंग की सुरक्षा को कड़ी कर दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनशन पर हैं। उनकी मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है।

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