कपिलसिंह चौहान
07 June, 2026
नीमच/रामपुरा। जिले के रामपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम खिमला में निर्माणाधीन 'ग्रीनको हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट' में रविवार को एक बार फिर सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ गईं। प्लांट में करीब 100 फीट की ऊंचाई से एक लिफ्ट धड़ाम से अचानक नीचे आ गिरी।wm लिफ्ट में 7 लोग सवार थे, इस भीषण हादसे में 5 मजदूरों के घायल होने की खबर आ रही है, जिनमें से एक की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है ।
हादसे के बाद प्लांट प्रबंधन में हड़कंप मच गया।wmआनन-फानन में प्लांट के निजी डॉक्टरों ने घायलों को संभालने की कोशिश की, लेकिन स्थिति बिगड़ती देख सभी 7 मजदूरों को तीन अलग-अलग एम्बुलेंस के जरिए जिला चिकित्सालय नीमच रेफर किया गया है।
सच छुपाने की कोशिश: कर्मचारियों के मोबाइल छीने !
सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी और चर्चा के मुताबिक, हादसे के तुरंत बाद ग्रीनको प्रोजेक्ट के जिम्मेदार अधिकारियों ने सच को दबाने और मामले को दबाने की कवायद शुरू की...बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों और कर्मचारियों के मोबाइल फोन जबरन छीन लिए गए ताकि कोई वीडियो या wmतस्वीर बाहर न आ सके। हालांकि एसडीएम किरण आंजना ने ऐसे किसी भी आरोप को खारिज कर दिया है।
बड़ा सवाल: क्या सिर्फ 'टूरिज्म' और 'स्वागत-सत्कार' के लिए आए थे मंत्री जी?
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला के दावों और प्रशासनिक समीक्षा की पोल खोलकर रख दी है।wm गौर करने वाली बात यह है कि महज तीन दिन पहले, 4 तारीख (गुरुवार) को ही मंत्री राकेश शुक्ला ने इस निर्माणाधीन साइट का दौरा किया था।
बढ़ा चढ़ा कर बताया गया था कि मंत्री जी ने प्रोजेक्ट साइट पर पहुंचकर निर्माण कार्यों की प्रगति और सुरक्षा मानकों का विस्तृत जायजा लिया। अधिकारियों की बैठक लेकर उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा के कड़े निर्देश दिए। इस दौरान रामपुरा एसडीएम किरण आजना, अक्षय ऊर्जा विभाग के अधिकारी राठौर सहित कई विभागों के आला अफसर भी मौजूद थे।wm
उठ रहे तीखे सवाल: मंत्री राकेश शुक्ला के दौरे के ठीक तीसरे दिन ही इतना बड़ा हादसा होना यह साबित करता है कि वह दौरा सिर्फ एक 'पॉलिटिकल टूरिज्म टूर' था। बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलना, गले में दुपट्टे डलवाना और अधिकारियों के साथ बैठकर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन देखना ही क्या असली समीक्षा है ? अगर सुरक्षा मानकों की गंभीरता से जांच हुई थी, तो 100 फीट ऊपर चल रही लिफ्ट का मेंटेनेंस क्यों नहीं परखा गया?wm
विकास की लापरवाहीपूर्ण दौड़ में कब तक बहेगा मजदूरों का खून?
आए दिन सुर्खियों और विवादों में रहने वाले खिमला ग्रीनको प्लांट में मजदूरों की सुरक्षा को हमेशा दांव पर रखा जाता रहा है। आज का यह हादसा प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही का नतीजा है। प्रशासन वाकई इस घटना को गंभीरता से लेता है तो हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाए सक्रियता दिखाते हुए कुछ कड़े कदम उठाने होंगे।wm
सबूतों की सुरक्षा: प्रशासन तुरंत दखल दे ताकि उपलब्ध मोबाइल फुटेज (यदि कोई है तो) और मौके पर मौजूद तकनीकी साक्ष्यों से ग्रीनको प्रबंधन छेड़छाड़ न कर सके।
घायलों का निशुल्क उच्च स्तरीय इलाज: जिला चिकित्सालय में लाए जा रहे मजदूरों को बिना किसी लापरवाही के त्वरित इलाज मिले।
कारवाई की दरकार: लापरवाह अधिकारियों को गिरफ्तार कर उन पर और ग्रीनको के शीर्ष प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ।
जब तीन दिन पहले हुए मंत्रियों और अफसरों के दौरों का यह हश्र है, तो भगवान भरोसे चल रहे इस खिमला प्रोजेक्ट में मजदूरों की जान की कीमत आखिर क्या रह जाती है, इसका जवाब अब शासन-प्रशासन को देना होगा।wm
"हादसे के वक्त लिफ्ट में कुल 7 लोग सवार थे, जिनमें से 2 मजदूर पूरी तरह सामान्य हैं। शेष 5 घायलों में से एक की हालत गंभीर बनी हुई है। सभी घायलों को तुरंत उपचार के लिए एम्बुलेंस के माध्यम से नीमच के निजी अस्पताल भेजा गया है। घटना की सूचना मिलते ही हम सभी प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे हैं । जहां तक प्रबंधन द्वारा लापरवाही बरतने या घटना को छुपाने के प्रयास की बात है, तो फिलहाल ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। प्रबंधन द्वारा हादसे के तुरंत बाद प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई थी।wm" - किरण आंजना, एसडीएम, मनासा