डेस्क न्यूज
06 June, 2026
प्रशासनिक
नाका नंबर-4 दरगाह के पास हुआ हादसा, गंभीर हालत में उदयपुर रेफर।
परिजनों का आरोप- हादसे के बाद विभाग का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा, इलाज भी अपने स्तर पर करा रहे।
नीमच। शहर के बघाना क्षेत्र में बिजली लाइन पर काम कर रहे एक लाइनमैन के साथ हुए गंभीर हादसे ने बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाका नंबर-4 दरगाह के पास विद्युत लाइन पर कार्य के दौरान करंट लगने से लाइनमैन त्रिलोक प्रजापति गंभीर रूप से घायल हो गए। करंट का झटका लगते ही वे पोल से नीचे गिर पड़े, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत चिंताजनक होने पर उदयपुर रेफर किया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
जानकारी के अनुसार त्रिलोक प्रजापति पुत्र हुकुमचंद प्रजापति मध्यप्रदेश विद्युत मंडल में लाइनमैन के पद पर कार्यरत हैं। गुरुवार को वे बघाना क्षेत्र स्थित नाका नंबर-4 दरगाह के पास विद्युत लाइन के रखरखाव और सुधार कार्य में लगे हुए थे। इसी दौरान अचानक अर्थ रिटर्न होने की आशंका के बीच उन्हें करंट लग गया। करंट का झटका इतना तेज था कि वे संतुलन खो बैठे और ऊंचाई से नीचे गिर गए।
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय नागरिकों ने तत्काल डायल-112 को सूचना दी और घायल कर्मचारी को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उदयपुर रेफर कर दिया।
परिजनों ने लगाए उपेक्षा के आरोप
घायल कर्मचारी के परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली। न तो अस्पताल पहुंचकर हालचाल जाना गया और न ही उपचार की कोई विशेष व्यवस्था की गई। परिजनों का कहना है कि वे अपने स्तर पर ही इलाज का पूरा खर्च और व्यवस्था संभाल रहे हैं।
स्टाफ की कमी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हादसे के बाद विभागीय कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग में लंबे समय से बनी हुई स्टाफ की कमी का मुद्दा भी उठाया है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार सीमित स्टाफ के कारण लाइनमैनों को पर्याप्त सहयोग के बिना ही जोखिम भरे कार्य करने पड़ते हैं। बिजली लाइनों पर काम करने के दौरान सुरक्षा उपकरण, निगरानी और तकनीकी सावधानियां बेहद आवश्यक होती हैं, लेकिन कई बार इन व्यवस्थाओं में कमी देखने को मिलती है।
कर्मचारियों का मानना है कि यदि पर्याप्त स्टाफ और सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध हों तो इस प्रकार की घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। हादसे ने एक बार फिर उन कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है, जो रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने का काम करते हैं।
उठ रहे कई सवाल
इस घटना के बाद लोगों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं। क्या लाइन पर कार्य शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? क्या लाइन पूरी तरह से शटडाउन थी? क्या मौके पर पर्याप्त तकनीकी सहायता उपलब्ध थी? और सबसे बड़ा सवाल, हादसे के बाद विभागीय जिम्मेदारी आखिर किसने निभाई?
फिलहाल घायल लाइनमैन का उपचार जारी है और पूरा परिवार उनकी सलामती की दुआ कर रहा है। वहीं यह घटना बिजली विभाग के सुरक्षा प्रबंधन और कर्मचारियों के कार्यस्थल संरक्षण को लेकर गंभीर चिंताओं को उजागर कर रही है।