डेस्क न्यूज
06 June, 2026
प्रशासनिक
मनासा। नगर परिषद मनासा ने शनिवार को अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुराने सरकारी अस्पताल के पीछे स्थित शासकीय सर्वे नंबर की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित आठ दुकानों पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र के अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है।
दोपहर 3 बजे भारी पुलिस बल के साथ पहुंचा अमला
शनिवार दोपहर करीब तीन बजे तहसीलदार मुकेश निगम, मुख्य नगरपालिका अधिकारी संजय पाटीदार, उपयंत्री रविश कादरी, नगर परिषद का दस्ता और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। इसके बाद दल-बल के साथ अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी।
यह पूरी कार्रवाई कुकड़ेश्वर के भाजपा नेता और नगर परिषद कुकड़ेश्वर के उपाध्यक्ष प्रतिनिधि उज्जवल पटवा से जुड़े निर्माण पर की गई है। मुक्त कराई गई लगभग 4800 वर्ग फीट भूमि की सरकारी गाइडलाइन के अनुसार कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है, ध्वस्त की गई दुकानों के निर्माण में लगभग 60 से 70 लाख रुपये की लागत आई थी।
क्या था मामला और कैसे हुई कार्रवाई?
इस अवैध निर्माण का मामला स्थानीय पत्रकार रवि उपाध्याय द्वारा उठाया गया था, जिसके बाद नगर परिषद को लिखित शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
10 मई 2023: नगर परिषद मनासा ने उज्ज्वल पटवा को नोटिस देकर सीमांकन होने तक निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया था।
18 मई 2023: पटवारी, राजस्व निरीक्षक (R.I.) कुलदीप डामोर, उपयंत्री रविश कादरी और परिषद के कर्मचारियों की उपस्थिति में निर्माण स्थल का सीमांकन किया गया। सीमांकन में पाया गया कि निर्माण स्वीकृत जगह से अधिक और सरकारी जमीन पर था। इसके बाद आर.आई. कुलदीप डामोर ने पंचनामा बनाकर परिषद को सौंपा।
परिषद का दावा: परिषद के अनुसार निर्माणकर्ता को केवल एक दुकान की अनुमति दी गई थी, लेकिन मौके पर आठ दुकानों का अवैध निर्माण कर लिया गया। इसके बाद परिषद ने निर्माण अनुमति और नामांतरण को निरस्त कर दिया था। यह मामला पहले एडीएम (ADM) कोर्ट पहुंचा था, जहां परिषद के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद नगर परिषद ने हाईकोर्ट का रुख किया।
मनासा CMO संजय पाटीदार ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि:
"उज्जवल पटवा द्वारा बनाई गई दुकानों को हटाया गया है क्योंकि यह निर्माण बिना वैधानिक अनुमति और नामांतरण के किया गया था। इसके साथ ही उनके पास टीएनसी का कोई अप्रूवल भी नहीं था। नगर पालिका परिषद ने पूर्व में ही इसके विरुद्ध प्रस्ताव पारित किया था। माननीय हाईकोर्ट ने नगर पालिका के प्रस्ताव को सही माना है और इसी आदेश के परिपालन में प्रशासन ने यह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है।