पंकज मलिक
31 July, 2025
मंदसौर/ जिले के जवासिया गांव में एक भावुक और अद्भुत नज़ारा देखने को मिला, जब एक मृतक की अंतिम इच्छा को उसके घनिष्ठ मित्र ने इस तरह पूरा किया कि हर कोई भावुक हो गया
2021 में लिखा था अपने अभिन्न मित्र को पत्र
गांव के रहने वाले सोहनलाल जैन ने कुछ वर्ष पहले अपने प्रिय मित्र अंबालाल प्रजापति और शंकरलाल पाटीदार को एक पत्र लिखा था। यह पत्र 9 जनवरी 2021 को लिखा गया था। इस पत्र में उन्होंने अपनी मौत के बाद अपनी अंतिम यात्रा में उनके सामने नाचने की इच्छा जताई थी। पत्र में उन्होंने लिखा — "जब मेरी अंतिम यात्रा निकले, तो तुम मेरे सामने नाचना, ताकि मुझे लगे कि मेरी विदाई खुशी के साथ हो रही है, जैसे मैं हमेशा हँसता-हँसाता जिया।"
अंत में उन्होंने लिखा था कि मुझसे जाने अनजाने कोई गलती हो गई हो तो मुझे माफ करना।
यह दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो उठा
आज, जब सोहनलाल जैन की अंतिम यात्रा निकली, तो गांव की गलियों में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। पारंपरिक डीजे बैंड की धुन पर उनके मित्र अम्बालाल प्रजापत ने शव यात्रा के आगे नृत्य किया — ठीक वैसे ही जैसे पत्र में इच्छा जताई गई थी। आँसू और मुस्कान का यह संगम देखकर गांव के लोग भावविभोर हो उठे। कुछ ने इन भावुक पलों को कैमरे में कैद किया तो कुछ ने नमन किया उस दोस्ती को जो मृत्यु के पार भी निभाई गई।
गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा तक, सभी ने इस अनोखे और दिल छू लेने वाले दृश्य की सराहना की। किसी ने कहा, "आज के जमाने में ऐसी दोस्ती दुर्लभ है," तो किसी ने कहा, "यह सिर्फ नाच नहीं था, यह एक वचन की पूर्ति थी, आत्मा को शांति देने की कोशिश थी।"
दोस्त नाचे जरूर पर दिल गमगीन था
अम्बालाल प्रजापत हालांकि शवयात्रा में नाचे जरूर पर उनका दिल भावुक था और दोस्त की यादें दिल में बसाए अपने खास मित्र को उसकी इच्छानुसार अंतिम बिदाई दी। ऐसी दोस्ती की मिसाल इस समय में देखने को कम मिलती है और ऐसे जिंदादिल इंसान भी कम मिलते हैं जो अपनी अंतिम इच्छा इस तरह की रखते हैं और ऐसे दोस्त भी कम मिलते हैं जो अपने दोस्त की अंतिम इच्छा के लिए अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर शोक को आल्हाद में बदल दे।
कोविड के दौर के बाद लिखा था पत्र,अपनी मौत को लेकर सजग थे सोहनलाल जैन
सोहनलाल जैन 2021 में ही इस पत्र को लिख चुके थे, यह वही साल था जब इससे पिछले 2 वर्षों में कोविड ने पूरी दुनिया में पैर पसार लिए थे और इसके चलते कई मौतें हुई थी। यही कारण रहा होगा कि मृत्य के प्रति उनका नजरिया बदला और अंदेशा हुआ कि मौत कभी भी आ सकती है. जिसके चलते उन्होंने इच्छा प्रकट की कि उनकी अंतिम यात्रा उत्सव के रूप में हो। इसके लिए उन्होंने अपने सबसे करीबी मित्रों को चुना और उनके नाम यह पत्र लिखा। पत्र के लिखने के दो वर्ष बाद 2023 में वे दुर्भाग्यवश कैंसर से पीड़ित हो गए और 29 जुलाई 2025 को उनकी मृत्यु हो गई।
पुत्र मुकेश जैन भी जानते थे पिता की अंतिम इच्छा,
कहा पिताजी भी उत्सव की तरह चाहते थे अंतिम यात्रा
पिता की अंतिम इच्छा को लेकर जब उनके पुत्र मुकेश जैन से बात की गई तो वे भी भावुक होकर बोले कि," मेरे पिता कहते थे कि जब शादी को उत्सव के रूप में मनाया जाता है और बैंड-बाजे ले जाए जाते हैं तो मृत्यु को भी एक उत्सव की तरह मनाना चाहिए और उसमें भी बैंड-बाजे बजना चाहिए और उन्होंने यही अंतिम इच्छा अपने दोस्तों से भी व्यक्त की थी. इसी कारण उनके दोस्तों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान रखते हुए उनकी शव-यात्रा में डांस किया. हमें संतुष्टि इस बात की है कि हमारे पिताजी ने मृत्यु को एक उत्सव के रूप में लिया और आखिरी सांस तक वह मृत्यु को लेकर सजग रहे। मृत्यु को उन्होंने हंसी-खुशी जिस रूप में स्वीकार किया वह अनुकरणीय है।"
यह घटना न केवल मित्रता की मिसाल है, बल्कि मृत्यु को लेकर समाज की सोच में बदलाव लाने का संदेश भी देती है — कि अंतिम यात्रा केवल शोक नहीं, व्यक्ति के जीवन का उत्सव भी हो सकती है।
मौत को गले लगाना इस तरह कि जिंदगी भी अजनबी सी लगे,अंतिम पड़ाव भी तो आखिर यही है।