ताजासमाचार

30 साल बाद जीरन तालाब की सीमा तय, 190 हेक्टेयर का सीमांकन पूरा; भू-माफियाओं पर कसेगा शिकंजा

राजेश लक्षकार 03 July, 2026 अन्य

जीरन। तीन दशक से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हो गई। जल संसाधन विभाग ने जीरन तालाब का बहुप्रतीक्षित सीमांकन कार्य पूरा कर लिया है। लगभग 190 हेक्टेयर क्षेत्र में हुए इस सर्वे के बाद अब तालाब की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो गई है। विभाग का कहना है कि सीमांकन के बाद डूब क्षेत्र में होने वाले अवैध कब्जों, मिट्टी के अवैध उत्खनन और भू-माफियाओं की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा, जबकि वैध खाताधारक किसानों की जमीन को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।

जानकारी के अनुसार 27 जून से शुरू हुआ सीमांकन अभियान 30 जून तक लगातार चलाया गया। तीन दिनों तक चले इस विशेष सर्वे अभियान में आधुनिक तकनीक की मदद से तालाब के पूरे क्षेत्र का सीमांकन किया गया। पिछले करीब 30 वर्षों से स्थानीय किसान और तालाब संरक्षण से जुड़े लोग इसकी मांग कर रहे थे, क्योंकि सीमांकन नहीं होने के कारण आए दिन जमीन को लेकर विवाद होते थे।

भू-माफियाओं के खेल पर लगेगी रोक

जल संसाधन विभाग के अनुसार सीमांकन नहीं होने का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने तालाब के डूब क्षेत्र में अवैध कब्जे कर लिए थे। गहरीकरण की अनुमति का दुरुपयोग करते हुए डूब क्षेत्र की मिट्टी का अवैध उत्खनन कर उसे बेचा जा रहा था। इतना ही नहीं, कुछ स्थानों पर करीब 10 फीट तक मिट्टी भरकर तालाब के प्राकृतिक क्षेत्रफल को भी कम करने की कोशिश की गई। अब सीमांकन के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-सी भूमि निजी खाताधारकों की है और कौन-सा हिस्सा तालाब के डूब क्षेत्र में आता है।

राजस्व रिकॉर्ड की होगी जांच

मैदानी सीमांकन पूरा होने के बाद अब जल संसाधन विभाग, राजस्व विभाग के सहयोग से आसपास की भूमि के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच करेगा। डूब क्षेत्र में आने वाली जमीनों की पहचान के बाद सीमांकित क्षेत्र के चारों ओर खाई बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके।

किसानों को किया आश्वस्त

कार्यपालन यंत्री हिमांशु भाबोर ने बताया कि तालाब का सीमांकन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अब शेष कागजी और तकनीकी प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जाएगी। इसके बाद सीमांकित क्षेत्र में खाई निर्माण का कार्य शुरू होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाब का लगभग 190 हेक्टेयर क्षेत्र सीमांकित किया गया है और इस कार्रवाई से वैध खाताधारक किसानों की निजी भूमि को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।

Related Post