डेस्क न्यूज
13 July, 2025
कोंग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटना की निंदा की
हरदा। मध्यप्रदेश के हरदा जिले में करणी सेना परिवार संगठन के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव ने बड़ा रूप ले लिया. बीती रात से ही विरोध करने धरने पर बैठे राजपूत समाज संगठन और सर्व समाज के लोगों को हटाने के लिए पुलिस ने दोबारा बल प्रयोग किया. सबसे पहले वाटर केनन से पानी की बौछारें छोड़ी गईं, फिर आंसू गैस के गोले दागे गए. आखिर में लाठीचार्ज कर खदेड़ा गया. लाठीचार्ज शुरू होते ही इलाके में भगदड़ मच गई. लोग इधर-उधर भागने लगे.
जीवनसिंह शेरपुर व टीम पर लाठीचार्ज
जावरा से हरदा पहुंचे करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर पर भी पुलिस ने डंडे बरसाए. पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और हालात काबू में लाने की कोशिश की. इतना ही नहीं, पुलिस का दबाव इतना बढ़ा कि एक बिल्डिंग में छिपे लोगों को निकालने के लिए जेसीबी से चैनल तोड़कर लोगों को बाहर निकाला गया और गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद पूरे शहर में हालात तावनपूर्ण बने हुए हैं.
यूँ बढ़ा विवाद
विवाद की जड़ में करणी सेना परिवार के जिलाध्यक्ष सुनील राजपूत की गिरफ्तारी और लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग है. इस पर संगठन के लोग अड़े हुए हैं. पुलिस ने बार-बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी. उधर, हरदा के राजपूत छात्रावास में भी करीब 250-300 लोगों के मौजूद होने की जानकारी मिली है. उन्हें हटाने के लिए पुलिस बल प्रयोग की तैयारी कर चुकी है. हरदा की ओर लगातार राजपूत समाज के लोग आसपास के जिलों से पहुंच रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है.
हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने मीडिया से कहा कि, “शांति भंग होने की स्थिति को देखते हुए लोगों को गिरफ्तार किया गया है. प्रशासन का कहना है कि हालात काबू में लाने के लिए यह कदम जरूरी था”.
फिलहाल, पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है. माहौल बेहद तनावपूर्ण है. राजपूत समाज के लोग हरदा की ओर कूच कर रहे हैं, जिससे हालात किसी भी वक्त और बिगड़ सकते हैं. प्रशासन अलर्ट मोड पर है.
कोंग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटना की निंदा की
हरदा की घटना पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने ट्वीट कर कलेक्टर एसपी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पटवारी ने दोनों अफसरों की बर्खास्तगी की मांग की। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा- “हरदा में करणी सेना/राजपूत समाज के साथ हुई पुलिस बर्बरता निंदनीय है। फिर साबित हो गया कि मोहन सरकार में न्याय और अधिकार की बात करना अपराध है!”