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एसडीएम ने जीरन भूमी विवाद प्रकरण में नामांतरण किया निरस्त, शब्बीर हुसैन व परिवार को मिला न्याय, तहसीलदार की भूमिका संदेह के घेरे में

कपिलसिंह चौहान 20 June, 2025

नीमच। (कपिल सिंह चौहान) नीमच जिले की जीरन तहसील के जिस चर्चित भूमी विवाद के मामले ने कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय को फुटबाल का मैदान बना दिया था उसमें नीमच एसडीएम संजीव साहू के एक निर्णय से जीरन के बोहरा परिवार के लंबे संघर्ष  को विराम और परिवार को न्याय मिला है।

बोहरा परिवार के पक्ष में आया निर्णय  

जीरन के शब्बीर हुसैन व अन्य विरुद्ध ज्योतिप्रकाश व अन्य प्रकरण में सर्वे नंबर 616, 614, 617, 618, रकबा 0.439 हेक्टेयर भूमि के संबंध में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी नीमच द्वारा आदेश पारित करते हुए उक्त जमीन का ज्योतिप्रकाश पिता बाबूलाल टांक के नाम से नामांतरण निरस्त कर दिया गया है । जीरन तहसील कार्यालय में उक्त भूमि के नामांतरण के खिलाफ बोहरा समाज के शब्बीर हुसैन सहित 9 व्यक्तियों ने एसडीएम कोर्ट में आपील की थी । इस अपील में बोहरा परिवार के पक्ष में निर्णय आया है ।

जीरन तहसीलदार की भूमिका संदेह के घेरे में

इस पूरे मामले में पाया गया की उच्च न्यायालय में प्रचलित वाद के बावजूद इस जमीन को 2 बार विक्रय कर दिया गया, और तो और नामांतरण भी कर दिया गया। इसलिए यह कहना उचित होगा की हरदेव भाटी और सत्यप्रकाश पाटीदार एवं ज्योतिप्रकाश निवासी सियाखेड़ी राजस्थान के नाम पर नामांतरण के मामले में जीरन तहसीलदार से भारी भूल हुई या संभव है की इस पूरे खेल में वे भी शामिल रहे हों। 

1951 से शब्बीर बोहरा एंड फेमेली कर रही संघर्ष

मामले में जानकारी अनुसार जीरन में ग्वालियर स्टेट के समय 1915 में रसूल बोहरा को सर्वे नंबर 614 से लेकर 618 तक की लगभग साढ़े 3 बीघा (0.439 हेक्टेयर) जमीन पट्टे पर दी गई थी। मगर सदाशिव राव परिवार ने जमीन पर हक जताया और 1951 में तहसील कार्यालय में प्रकरण लगाया। तब से लेकर अब तक मामला राजस्व मंडल ग्वालियर से लेकर हाईकोर्ट खंडपीठ इंदौर और सुप्रीम कोर्ट तक चला। इसी दौरान शंकरराव पिता सदाशिवराव के पुत्र प्रकाश राव ने 21 अक्टूबर 2020 को हरदेव पिता कारूलाल भाटी और सत्यप्रकाश पिता नंदकिशोर पाटीदार को भूमि बेच दी और नामांतरण भी हो गया।

हाईकोर्ट के आदेश की भी की गई अवमानना

जबकि नवंबर 2023 में सदाशिव की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील खारिज भी हो गई। लेकिन इधर जीरन तहसील में हरदेव भाटी और सत्याकाश पाटीदार के नाम से नामांतरण भी स्वीकृत कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस संबंध में नामांतरण नहीं किए जाने के आदेश दिए थे लेकिन पालन सुनिश्चित नहीं हुआ । और तो और जमीन एक बार फिर विक्रय कर दी गई ।  हरदेव भाटी और सत्यप्रकाश पाटीदार ने 25.10.2024 को ज्योतिप्रकाश टांक को इसे बेच दिया। तहसील कार्यालय से इनका नामांतरण भी स्वीकृत हो गया। इसके खिलाफ शब्बीर हुसैन, मुईज हुसैन सहित नौ लोगों ने एसडीएम न्यायालय में अपील की और 16 जून 2025 को एसडीएम न्यायालय ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

न्यायालय में विचाराधीन रहते भूमी का विक्रय और नामांतरण किया गया   

मामले में महत्वपूर्ण बात यह है की इस भूमी का क्रय-विक्रय तब चलता रहा जब सर्वोच्च न्यायालय में प्रकरण विचारधीन था। बोहरा परिवार के विरोधीयों ने जमीन को दो बार विक्रय कर अभिलेखों में नामांतरण भी करवा लिया । इसके विरुद्ध बोहरा परिवार द्वारा नीमच के तात्कालीन एसडीएम नीमच के समक्ष अपील की गई। लेकिन उक्त अपील का निराकारण गुण दोषों के आधार पर करने के बजाए प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय उभे पक्ष पर बंधन कारी रहेगा” लेख कर निर्णय कर दिया गया। जिसके चलते बोहरा परिवार के विपक्षियों को जमीन का पुनः विक्रय करने का अवसर मिल गया। यहाँ तक की  एसडीएम के उक्त निर्णय के विरुद्ध बोहरा परिवार ने संभागायुक्त के समक्ष अपील की थी जो की वर्तमान में भी विचाराधीन है। मामला कमिश्नर के समक्ष विचारधीन था उसके बावजूद विपक्षी हरदेव भाटी और सत्यप्रकाश द्वारा उक्त भूमी ज्योतिप्रकाश को विक्रय कर दी गई। इस विक्रय की जानकारी होने पर बोहरा परिवार द्वारा एक रिट पिटीशन इंदौर हाईकोर्ट के समक्ष लगाई गई। हाईकोर्ट द्वारा मामला कमिशनरेट में विचाराधीन होने की वजह से नामांतरण पर स्थगन रखा गया। लेकिन इस स्थगन के बावजूद जीरन तहसीलदार द्वारा नामांतरण स्वीकृत कर अभिलेखों में दर्ज करवा दिया गया। मगर इससे साफ है की इस मामले में बहुमाफियाओं के साथ सांठगांठ कर जीरन तहसील में बड़ा खेल खेला गया। जल्द ही इस खेल के सभी किरदार सामने होंगे।

बोहरा परिवार की जीरन स्थित इस भूमी के लिए आए दिन भूमाफिया के लोग विवाद करते थे और जमीन कब्जाने की नियत से मौके पर आ धमकते थे । हाँलांकी अब एसडीएम संजीव साहू के नामांतरण निरस्ती के निर्णय से दशकों बाद बोहरा परिवार को न्याय मिला है।  

यह भी पढ़ेंजीरन में फर्जी रजिस्ट्री के सहारे बोहरा परिवार की जमीन हथियाने का आरोप 

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