द वाॅचमेन पोस्ट
20 July, 2026
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नीमच। कभी अंग्रेजों की प्रमुख छावनी रहे नीमच की ऐतिहासिक पहचान पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले की धरोहर मानी जाने वाली पुरानी कचहरी परिसर से सदियों पुरानी दो ऐतिहासिक तोपों में से एक रहस्यमय तरीके से गायब हुए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो चोरी गई तोप का कोई सुराग मिला है और न ही इस मामले में किसी जिम्मेदार की जवाबदेही तय हो सकी है। इस बीच जागरूक नागरिक अमरदीप उपाध्याय ने एक बार फिर प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
पुरानी कचहरी अंग्रेजों के शासनकाल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों में गिनी जाती है। इसके मुख्य प्रवेश द्वार पर वर्षों से विभिन्न धातुओं से निर्मित दो ऐतिहासिक तोपें स्थापित थीं, जिन्हें शहर की विरासत और सैन्य इतिहास का प्रतीक माना जाता था। वर्ष 2024 में इनमें से एक तोप रहस्यमय परिस्थितियों में चोरी हो गई। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी और भारी ऐतिहासिक धरोहर के गायब होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
2024 में की थी पहली शिकायत
अमरदीप उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने 3 सितंबर 2024 को जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर चोरी हुई तोप की बरामदगी, दोषियों की गिरफ्तारी और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की थी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि पूर्व में विधायक दिलीप सिंह परिहार द्वारा दोनों तोपों को कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें फिर से पुरानी कचहरी परिसर में स्थापित कर दिया गया। इसके बाद सुरक्षा में लापरवाही के चलते एक तोप चोरी हो गई।
अब भेजा प्री-लिटिगेशन लीगल नोटिस
अमरदीप उपाध्याय का कहना है कि शिकायत के बाद भी न तो जांच की स्थिति सार्वजनिक की गई और न ही चोरी हुई तोप की बरामदगी को लेकर कोई जानकारी सामने आई। ऐसे में उन्होंने 2 मार्च 2026 को जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, संस्कृति विभाग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को प्री-लिटिगेशन लीगल नोटिस भेजकर निष्पक्ष जांच, प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है।
हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो इस मामले में उच्च न्यायालय में रिट याचिका अथवा जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी। साथ ही चोरी की जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने, आवश्यक होने पर स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने तथा पुरानी कचहरी सहित जिले की सभी ऐतिहासिक धरोहरों पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई है।
सिर्फ चोरी नहीं, विरासत संरक्षण का मामला
यह मामला अब केवल एक ऐतिहासिक तोप की चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नीमच की ऐतिहासिक पहचान, प्रशासनिक जवाबदेही और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब अंग्रेजों की छावनी के गौरवशाली इतिहास की पहचान रही इतनी बड़ी धरोहर सुरक्षित नहीं रह सकी, तो जिले की अन्य ऐतिहासिक धरोहरें कितनी सुरक्षित हैं।
क्या बोलीं एडिशनल एसपी
इस संबंध में एडिशनल एसपी हेमलता अग्रवाल से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि "यह मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है। यदि इस संबंध में कोई शिकायती आवेदन प्राप्त होता है तो पुलिस जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई करेगी।"