डेस्क न्यूज़
26 July, 2026
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नीमच। क्रमांक-2 (हायर सेकेंडरी) मैदान को बचाने की मुहिम अब सड़क पर उतर आई है। भारत माता चौराहे पर रविवार को खिलाड़ी, खेल प्रेमी, समाजसेवी और बड़ी संख्या में आम नागरिक एकत्रित हुए। सांदीपनि विद्यालय (सीएम राइज़ स्कूल) के प्रस्तावित निर्माण का विरोध करते हुए सभी ने एक स्वर में कहा— स्कूल भी चाहिए, लेकिन शहर के आखिरी बड़े खेल मैदान की कीमत पर नहीं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शहर को आधुनिक स्कूल जरूर चाहिए, लेकिन उसके लिए शहर का आखिरी बड़ा सार्वजनिक खेल मैदान खत्म करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि सांदीपनि विद्यालय के लिए किसी अन्य उपयुक्त शासकीय भूमि का चयन किया जाए और क्रमांक-2 मैदान को स्थायी रूप से खेल मैदान घोषित कर संरक्षित किया जाए।
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही वैकल्पिक भूमि पर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार कपिल सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासन विवादित और कब्जे वाली सरकारी जमीनों को मुक्त कराने की बजाय आसान रास्ता अपनाते हुए खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। उन्होंने कहा कि शहर में कई स्थानों पर शासकीय भूमि उपलब्ध है और कई जगह भूमाफियाओं का कब्जा है, लेकिन उन जमीनों को मुक्त कराने के बजाय खेल मैदान को खत्म करने की तैयारी की जा रही है।
वहीं करनी सेना जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह रूपरा ने कहा कि क्रमांक-2 मैदान ने नीमच को अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। यदि यह मैदान भी समाप्त हो गया तो आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के पास अभ्यास करने के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं बचेगा।
संडे क्रिकेट क्लब के सुनील जैन ने कहा कि यह मैदान सिर्फ खिलाड़ियों का नहीं, बल्कि पूरे शहर का है। यहां बच्चे खेलते हैं, युवा अभ्यास करते हैं और बुजुर्ग सुबह-शाम टहलने आते हैं। उन्होंने मांग की कि सांदीपनि विद्यालय का निर्माण शहर में उपलब्ध किसी अन्य खाली शासकीय भूमि पर किया जाए और इस मैदान को खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा जाए।
प्रदर्शन को शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाजों का भी व्यापक समर्थन मिला। नवीन अग्रवाल, सत्येंद्र सिंह राठौर, संजय सक्सेना, कीर्ति पंचोली, बृजेश मित्तल, राकेश अहीर तथा सिंधी समाज अध्यक्ष ईश्वर आहूजा सहित करीब 20 से 22 समाजों के प्रतिनिधि आंदोलन में शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में मांग की कि क्रमांक-2 मैदान को स्थायी रूप से संरक्षित किया जाए और सांदीपनि विद्यालय के लिए शहर के भीतर ही शीघ्र वैकल्पिक शासकीय भूमि का चयन किया जाए।