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एक-एक कर छीने जा रहे नीमच में खुली हवा में सांस लेने के ठिकाने, अब हायर सेकेंडरी के आखिरी बचे मैदान और ‘लाल माटी’ की अंतिम पहचान पर वकृ दृष्टि - कपिल सिंह चौहान

कपिलसिंह चौहान 25 July, 2026 अन्य

बच्चों से बचपन, बुजुर्गों से आबोहवा और युवाओं से सेहत क्यों छीनी जा रही ?
कपिल सिंह चौहान। विशेष संपादकीय। द वॉचमैन पोस्ट   

शहर सिर्फ ईंट, पत्थरों और ऊंची इमारतों से नहीं बनता। कभी नीमच की आबोहवा, उसकी महक, हवादार  'कॉमन स्पेस' और सार्वजनिक मैदान शहर के प्राण थे। आदर्श शहर वह है, जहाँ बच्चे सुबह-शाम दौड़ते हैं, युवा पसीना बहाते हैं और बुजुर्ग टहलते हुए दो पल सुकून के बिताते हैं। लेकिन अफ़सोस, नीमच की लाल माटी की जीवनशैली, अब प्रशासनिक अकर्मण्यता और जनप्रतिनिधियों की सहूलियत वाली राजनीति की बलि चढ़ रही है।
ज़रा ठंडे दिमाग से सोचिए, नीमच शहर के पास आज अपने बच्चों को देने के लिए कौन सा खेल मैदान बचा है?

एक-एक कर 'क़ब्ज़े' में जाते शहर के सार्वजनिक मैदान
इतिहास गवाह है कि जब-जब प्रशासन को किसी नए भवन निर्माण या राजनीतिक रसूख की जगह चाहिए होती है, उनकी सीधी नज़र नीमच के किसी खाली खेल मैदान पर पड़ी और मैदान बली चढ़ते गए।
दशहरा मैदान: कहने को खेल मैदान है, लेकिन इसका उपयोग पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों और आयोजनों में सिमट कर रह गया है। स्थिति यह है कि एक समय में केवल एक ही टीम ही यहाँ बमुश्किल क्रिकेट खेल पाती है।
विकास नगर (14/4) मैदान: यहाँ बालिकाओं के लिए छात्रावास और विद्यालय का निर्माण कर मैदान को  खत्म कर दिया गया।
बंगला नंबर 60 (पुरानी नगरपालिका क्षेत्र): शहर के बीचों-बीच स्थित इस ऐतिहासिक मैदान पर अब भारतीय जनता पार्टी का भव्य कार्यालय आकार ले रहा है।
गोमाबाई-हुडको कॉलोनी का मैदान: यहाँ वर्षों से भाजपा का ज़िला कार्यालय 'तपोभूमि' संचालित हो रहा है, जिसने मोहल्ले के मैदान का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया।

अब ‘हार्ट ऑफ़ द सिटी’ पर प्रहार: 'हायर सेकेंडरी स्कूल' का मैदान निशाने पर!
शहर के नक्शे को देखें तो अब केवल एक 'हृदय स्थल' बचा है,  ‘शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल का विशाल मैदान’। यह कोई साधारण मैदान नहीं है। यह शास्त्री नगर, जवाहर नगर, विकास नगर, 14/4, टीचर कॉलोनी, हुडको कॉलोनी, नया बाज़ार, बोहरा गली, सिंधी कॉलोनी, सब्ज़ी मंडी और इंदिरा नगर समेत दर्जनों मोहल्लों सहित नीमच के युवाओं और बच्चों के लिए संजीवनी है। 
हायर सेकंडरी मैदान में एक साथ कई टीमों के बच्चे क्रिकेट और फुटबॉल खेलते हैं। बास्केटबॉल कोर्ट पर सुबह-शाम सैकड़ों बच्चे पसीना बहाते हैं। नीमच की कई पीढ़ियाँ बीत गई, यहाँ हजारों युवाओं ने खेल के माध्यम से सीने टकराए, दाव लगाए, गिल्ली – डंडा, पतंग से लेकर क्रिकेट, फुटबॉल की हार-जीत पर खुशी और गम में आँसू बहाए और सजीव अटूट रिश्ते बनाए हैं। साईकल-कार चलाना सीखना हो, फिज़िकल ट्रेनिंग हो, बुजुर्गों की मॉर्निंग वॉक हो, 26 जनवरी-15 अगस्त की परेड हो या दिवाली का पटाखा बाज़ार, यह विशाल मैदान पूरे नीमच का 'सोशल हब' रहा है।

लेकिन अब ज़िला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अपनी सहूलियत के लिए इस अंतिम सांस लेते मैदान पर भी 'सांदीपनि विद्यालय' (सीएम राइज़ स्कूल) के निर्माण की मुहर लगा दी है।

विवादित जमीन मामलों से डर, आसान रास्ता ही क्यों?
बड़ा सवाल यह है कि बीते 7-8 वर्षों से प्रशासन सांदीपनि विद्यालय के लिए शहर में कोई अन्य उपयुक्त ज़मीन क्यों नहीं खोज पाया? सच्चाई यह है कि नीमच शहर में दर्जनों विशाल भूखंडों पर भूमाफियाओं का अवैध और विवादित क़ब्ज़ा है। मास्टर प्लान के अनुरूप कई बीघा शासकीय ज़मीनें अब भी दबाकर रखी गई हैं। लेकिन भूमाफियाओं के पचड़े में पड़ने और उनसे ज़मीन छुड़ाने की हिम्मत जुटाने के बजाय, प्रशासन और नेताओं ने 'सबसे आसान रास्ता' चुना कि एक हंसते-खेलते सार्वजनिक मैदान की बलि चढ़ा दो!

'सांदीपनि' के बाद ज़मीन कहाँ से लाओगे?
प्रशासन द्वारा नीमच वासियों को स्कूल के नाम पर ब्लेक मेल किया जा रहा है और मैदान छीना जा रहा है।  अरे जिस तरह बच्चों के लिए स्कूल जरूरी है, उसी तरह इस मैदान का अस्तित्व भी बच्चों के लिए जरूरी है'। और सोचिए, क्या सांदीपनि के बाद नीमच में विकास थम जाएगा! कल को शहर के लिए कृषि महाविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज या अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज़मीन चाहिए होगी, तब आप किस मैदान पर कब्ज़ा करेंगे? क्या तब सड़कों और मकानों को तोड़ेंगे? अगर आज नीति निर्माताओं की अकर्मण्यता का यह आलम है, तो भविष्य के निर्माणों के लिए ज़मीन का इंतज़ाम कहाँ से होगा?

सौगात के बदले 'सौगात' मत छीनिए!
नीमच शहर को सांदीपनि विद्यालय जैसी आधुनिक शैक्षणिक संस्था की सख्त आवश्यकता है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन 'एक सौगात देने के लिए दूसरी सबसे बड़ी सौगात छीन लेना' कहाँ की बुद्धिमत्ता है?
यदि एक बार इस हायर सेकेंडरी मैदान पर कंक्रीट का लेंटर डल गया, तो नीमच की लालमाटी की अंतिम पहचान भी खो जाएगी। और चाहकर भी नीमच शहर के बीचों-बीच इतना विशाल, हरा-भरा और बहुउपयोगी मैदान दोबारा कभी नहीं बनाया जा सकेगा।

वक्त है चेतने का: प्रशासन तुरंत खोजे 'वैकल्पिक स्थल'
ज़िला प्रशासन, कलेक्टर और शहर के जनप्रतिनिधियों को अब अपनी आंखें खोलनी होंगी। भूमाफियाओं के कब्ज़े वाली विवादित सरकारी ज़मीनों का तत्काल निपटारा कर, उन्हें कब्ज़ा मुक्त कराया जाए।

सांदीपनि विद्यालय (सीएम राइज़) का निर्माण शीघ्रातिशीघ्र किसी अन्य उपयुक्त और विशाल भूखंड पर किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को उनका सपनों का स्कूल मिले। विभिन्न निर्माणों के बाद शेष बचे हायर सेकेंडरी मैदान को अधिकृत रूप से ‘खेल मैदान' घोषित कर इसे भविष्य की पीढ़ियों, बच्चों, बुजुर्गों और नीमच के लिए हमेशा के लिए संरक्षित किया जाए।

शहर केवल कंक्रीट की इमारतों से सुंदर नहीं बनता, उसकी सुंदरता उसके खुले मैदानों और खेलती हुई सांसों में बसती है। यदि आज नीमच के प्रबुद्ध नागरिक, युवा और जनप्रतिनिधि इस आखिरी मैदान को बचाने के लिए आगे नहीं आए, तो आने वाली नस्लें हमें माफ नहीं करेंगी! 

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