डेस्क न्यूज
26 July, 2026
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नीमच। धर्मनगरी नीमच रविवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के रंग में रंग गई। अवसर था पूज्य साध्वी अमिपूर्णाश्रीजी महारासा के सानिध्य में आयोजित ज्ञानोत्सव चातुर्मास के भव्य मंगल प्रवेश का। नगर की लाडली पूज्य मृदपूर्णाश्रीजी महारासा एवं पूज्य जिनांगपूर्णाश्रीजी महारासा सहित कुल 10 साध्वियों के ठाणे के नीमच आगमन पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। शहरभर में जगह-जगह पुष्पवर्षा, मंगलगान और जयघोष के बीच साध्वी वृंद का भावभीना स्वागत किया गया। साध्वीश्री के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो उठीं और पूरा शहर धर्ममय वातावरण में डूब गया।
प्रातः जैन भवन से मंगल प्रवेश शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा वीर पार्क रोड, महेश सर्कल, कमल चौक, घंटाघर और पुस्तक बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः जैन भवन पहुंची। शोभायात्रा में समाज के सभी वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। महिलाएं, युवा, बच्चे और वरिष्ठजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। मार्गभर श्रद्धालुओं ने साध्वी वृंद के दर्शन कर वंदन किया तथा "णमो अरिहंताणं" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री का अभिनंदन किया और धर्म लाभ प्राप्त किया।
शोभायात्रा के समापन पर जैन भवन में विशाल धर्मसभा आयोजित की गई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी अमिपूर्णाश्रीजी महारासा ने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, तप, त्याग, स्वाध्याय और आत्मकल्याण का अनुपम पर्व है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्ममंथन कर जीवन को नई दिशा देने का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप तभी सार्थक होता है, जब वह केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर व्यक्ति के व्यवहार, विचार और आचरण में भी दिखाई दे।
अपने प्रेरक प्रवचन में साध्वीश्री ने अहिंसा, क्षमा, करुणा, संयम और सदाचार जैसे मानवीय मूल्यों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि आत्मचिंतन और आत्मअनुशासन से ही व्यक्ति का जीवन सार्थक और सफल बनता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि चातुर्मास के चार महीनों में अधिक से अधिक धर्म आराधना, स्वाध्याय, तप, सेवा और सद्कार्यों से जुड़कर अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक ले जाएं।
धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने साध्वी वृंद से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और धार्मिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। साध्वी वृंद के मंगल प्रवेश से नीमच का वातावरण पूर्णतः धर्ममय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का संकल्प भी लिया।