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हरिनाम संकीर्तन से गूंजा नीमच, हजारों श्रद्धालुओं के बीच निकली तृतीय श्री जगन्नाथ महारथ यात्रा, बाल रथ बना सबसे बड़ा आकर्षण

द वाॅचमेन पोस्ट 24 July, 2026

माहेश्वरी भवन से शुरू हुई भव्य यात्रा, मार्गभर पुष्पवर्षा, 1008 भोग और महाप्रसाद के साथ संपन्न हुआ आस्था का महापर्व

नीमच। शुक्रवार को नीमच शहर पूरी तरह श्रीकृष्ण और भगवान जगन्नाथ की भक्ति में रंगा नजर आया। अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावना अमृत संघ (इस्कॉन) के तत्वावधान में निकली तृतीय श्री जगन्नाथ महारथ यात्रा ने पूरे शहर को हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और जय जगन्नाथ के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान कर दिया। यात्रा में हजारों श्रद्धालु, महिलाएं, युवा और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दिव्य दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
महेश्वरी भवन से वैष्णव परंपरा के अनुसार विधि-विधान से यात्रा का शुभारंभ हुआ। परंपरा के अनुरूप सबसे पहले प्रतीकात्मक स्वर्णिम झाड़ू से मार्ग का शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद भगवान की महाआरती संपन्न हुई। इस अवसर पर समाजसेवी अशोक अरोरा (गंगानगर) सहित इस्कॉन मंदिर के पुजारियों ने पूजा-अर्चना कर रथयात्रा का शुभारंभ कराया।
जैसे ही भगवान का सुसज्जित महारथ आगे बढ़ा, पूरा वातावरण "हरे कृष्ण-हरे राम" के संकीर्तन और "जय जगन्नाथ" के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया। गंगानगर कार्यालय पर भी भगवान जगन्नाथ का विशेष स्वागत किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

बाल रथ बना सबसे बड़ा आकर्षण
इस वर्ष की महारथ यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण बाल रथ रहा। भगवान के छोटे रथ को नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ खींचा। बच्चों की मासूम भक्ति और उत्साह ने सभी का मन मोह लिया। वहीं युवक-युवतियां मृदंग, करताल और भक्ति गीतों की मधुर धुनों पर हरिनाम संकीर्तन करते हुए झूमते-नाचते नजर आए।

तीन दिवसीय भागवत कथा का हुआ समापन
महारथ यात्रा से पहले 21 से 23 जुलाई तक माहेश्वरी भवन में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कथा वाचक श्रीपाद वसुश्रेष्ठ प्रभुजी ने भगवान श्रीकृष्ण की वृंदावन लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भक्ति, सेवा और धर्म का संदेश दिया। प्रतिदिन गीत गोविंद के गायन और भगवान जगन्नाथ की विशेष शयन आरती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत किया।
1008 भोग और महाप्रसाद के साथ हुआ समापन
महारथ यात्रा के समापन पर भगवान जगन्नाथ को 1008 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। इसके बाद आयोजित विशाल महाप्रसाद भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान इस्कॉन के पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया। भक्ति, सेवा और हरिनाम संकीर्तन से परिपूर्ण इस आयोजन ने एक बार फिर नीमच को आध्यात्मिक उल्लास और धार्मिक आस्था के रंग में रंग दिया।

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