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पेपर लीक पर पीएम मोदी की 'महापाप' की स्वीकारोक्ति: देर से स्वीकार की गई नाकामी! सड़क से संसद तक पहुँची आंच तो ‘अमंगल’ की आशंका में 'मंगल मिलन'

कपिलसिंह चौहान 22 July, 2026 राजनीति

 

  • कपिल सिंह चौहान। द वॉचमैन पोस्ट

नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर से इंदौर तक भड़के छात्र आंदोलन की आंच आखिरकार संसद तक भी पहुंच गई। घोर ‘अमंगल’ की आशंका को भांपते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जुलाई की सुबह घटक दलों के सांसदों के साथ 'मंगल मिलन' बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने पहली बार नीट पेपर लीक पर चुप्पी तोड़ते हुए इसे "महापाप" करार दिया और दोषियों को कड़ी सजा देने का संकल्प जताया।

मोदी के 'सफलता' के दावे पर खुलती उनकी सरकार की पोल
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पीएम मोदी ने दोबारा आयोजित नीट परीक्षा (Re-EXAM) के सफल और 'पवित्रता' के साथ संपन्न होने पर मंत्रियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि "जब पूरी सरकार मिलकर काम करती है, तो हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।"
लेकिन पीएम की इस तारीफ और बयानबाजी ने सरकार की ही पिछली नाकामियों की पोल खोलकर रख दी है-  
Whole-of-Government Approach की कमी: प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार अगर दोबारा परीक्षा कराने के सामूहिक प्रयास तारीफ के काबिल हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि पहली बार परीक्षा के दौरान सरकार में तालमेल और गंभीरता पूरी तरह नदारद थी।  "आगे ऐसा न हो, इसके पुख्ता इंतज़ाम करेंगे", पीएम का यह आश्वासन खुद साबित करता है कि पेपर लीक के वक्त सुरक्षा और निष्पक्षता के इंतज़ाम बदहाल थे।
दोबारा परीक्षा कराने पर अगर मंत्रियों की पीठ थपथपाई जा रही है, तो पेपर लीक के वक्त हुए इस "महापाप" और व्यवस्थागत विफलता के लिए जिम्मेदार मंत्रियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई? सरकार संतुष्ट है की दोबारा परीक्षा निर्बाध संपन हुई, मगर इतने भर से देश भर में उन एक दर्जन से ज्यादा आत्महत्या करने वाले छात्र-छात्राओं के साथ न्याय तो नहीं हो जाता जिन्होंने हताशा में अपनी जान दे दी.जब कड़ाई और सामूहिक प्रयास से पेपर लीक रोका जा सकता है, तो पहले यह ढिलाई क्यों बरती गई? री-एग्जाम पर बधाई स्वीकार करने वाली सरकार महापाप के जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब करेगी? यही सवाल आज जंतर-मंतर से लेकर इंदौर तक की सड़कों पर गूंज रहा है।

सवाल यह भी है की बीते एक माह से चल रहे संघर्ष को नजर अंदाज करती सरकार ने संसद के मानसून सत्र पर ही क्यों जबान खोली ? ‘अमंगल’ की आशंका के चलते ‘मंगल मिलन’ कर पेपर लीक को ‘महापाप’ करार तब दिया गया जब गुंडा करार दिए गए ‘कोकरोचों’ की भारी भीड़ जंतर-मंतर और दिल्ली की सीमाओं को लांघ कर इंदौर की सडकों तक दिखाई देने लगी। 
विश्व की सबसे बड़ी पार्टी को नहीं मिल रहा धर्मेन्द्र प्रधान का विकल्प ! 
शुरुआत में ही मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया जाता तो देश भर में हो रही भाजपा और मोदी सरकार की किरकिरी से बचा जा सकता था।  कितना दिलचस्प है की कई राज्यों में वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर हर किसी नौसिखिए को मुख्यमंत्री का ताज पहना देने वाले मोदी-शाह को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी में धर्मेन्द्र प्रधान का विकल्प नहीं मिल रहा ! 

हर प्लेटफॉर्म पर सरकार की फजीहत
अपने दिल को बहलाने के लिए आप भले ही आंदोलनकारियों को 'गुंडे', आंदोलन को 'विदेशी फंडिंग से पोषित' और 'अराजक' करार दे दें, लेकिन आम जनता के गले यह बात नहीं उतर रही। अब इन्हीं 'गुंडों' को मंत्रालय बुलाकर सरकार को बातचीत करनी पड़ रही है और 'राष्ट्रद्रोही' बताए गए सोनम वांगचुक से मिलने केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल जाना पड़ रहा है। पेपर लिक कोई आज का मुद्दा नहीं है, हर सरकार में यह होता आया है... महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस बार जिस तरह जनता के जहन में मोदी सरकार के विरुद्ध स्वर मुखर हुआ है वह अभूतपूर्व है... पेपरलीक ने इस विरोध को ट्रिगर किया है और गोदी मीडिया के भरोसे बैठी सरकार को सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर फजीहत झेलनी पड़ रही है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि वोट कबाड़ने में माहिर भाजपा का खुमार अब जनता के सिर से उतरता दिख रहा है ? यह ना भी हो, तो किरकिरी तो जबरदस्त हुई है।

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