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गांव के इकलौते खेल मैदान पर कब्जे का आरोप, 45 साल पुराने पट्टों की जांच की मांग

डेस्क न्यूज़ 21 July, 2026 प्रशासनिक

नीमच। जिले के ग्राम लेवड़ा में वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में आ रही भूमि को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गांव के एकमात्र खेल मैदान और सामाजिक आयोजनों के लिए उपयोग होने वाली भूमि पर कब्जे के प्रयास का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने करीब 45 साल पुराने पट्टों की जांच कर उन्हें निरस्त करने और भूमि को पुनः शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज कर सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद सामने आया है, वह लंबे समय से गांव के बच्चों के लिए खेल मैदान के रूप में उपयोग होती रही है। यहां फुटबॉल, क्रिकेट सहित विभिन्न खेल गतिविधियां आयोजित होती हैं। इसके अलावा विवाह, मौसर और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी यही स्थान गांव का प्रमुख केंद्र रहा है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने दावा किया कि वर्ष 1981 में बीस सूत्रीय कार्यक्रम के तहत कुछ लोगों को शासकीय भूमि के पट्टे दिए गए थे, लेकिन शिकायत के बाद तत्कालीन कलेक्टर मंदसौर ने मौके का निरीक्षण कर संबंधित पट्टों को निरस्त कर दिया था। ग्रामीणों के अनुसार उस समय भूमि को कृषि योग्य नहीं मानते हुए रहवासी उपयोग के लिए दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 1989-90 के बंदोबस्त के दौरान इसी भूमि का नया खसरा क्रमांक 241 बनाकर कुछ लोगों के नाम निजी खातेदारी दर्ज कर दी गई। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और आज भी मौके पर भूमि का उपयोग सार्वजनिक रूप से किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा भूमि पर कब्जा जमाने और मैदान को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है, जिससे गांव में असंतोष का माहौल है। उनका कहना है कि यदि खेल मैदान खत्म हो गया तो बच्चों और युवाओं के पास खेल गतिविधियों के लिए कोई वैकल्पिक स्थान नहीं बचेगा।

ज्ञापन में कलेक्टर से मांग की गई है कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड, बंदोबस्त दस्तावेज और पट्टों की वैधता की जांच कराई जाए। यदि भूमि पर निजी नाम नियम विरुद्ध दर्ज पाए जाते हैं तो उन्हें निरस्त कर शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया है कि मामले का समय रहते समाधान नहीं हुआ तो गांव में विवाद और तनाव की स्थिति बन सकती है। अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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