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हादसे के बाद मौत से लड़ेगी खाकी...! नीमच एसपी राजेश व्यास के 'जीवन संजीवनी अभियान' में जवान सीख रहे CPR और जीवन बचाने के गुर

मनीष नायक 13 June, 2026 अन्य

सड़क हादसों में अक्सर जख्मों से ज्यादा देरी जान लेती है। इसी देरी को मात देकर जिंदगियां बचाने के उद्देश्य से नीमच पुलिस ने शुरू किया 'जीवन संजीवनी अभियान' 

नीमच | नीमच में हर साल सड़क हादसे सैंकड़ो परिवारों की खुशियां छीन लेते हैं। कई बार दुर्घटना इतनी भयावह नहीं होती कि व्यक्ति की जान चली जाए, लेकिन समय पर मदद नहीं मिलने के कारण जिंदगी मौत की जंग हार जाती है। सड़क पर घायल पड़ा व्यक्ति उस वक्त किसी अधिकारी, किसी प्रक्रिया या किसी दस्तावेज का इंतजार नहीं कर रहा होता... वह इंतजार कर रहा होता है एक ऐसे हाथ का, जो उसे मौत के मुंह से खींचकर वापस जिंदगी की ओर ला सके।

इसी सोच के साथ नीमच पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने शुरू किया है "जीवन संजीवनी अभियान", एक ऐसा अभियान जो सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का संकल्प है।

3 साल में 1048 सड़क हादसे, 338 लोगों की मौत
 जिले में वर्ष 2023 में 359 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 101 लोगों की मौत हुई।
 वर्ष 2024 में 368 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 120 लोगों की जान गई।
 वर्ष 2025 में 321 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 117 लोगों की मृत्यु हुई।
इन चिंताजनक आंकड़ों के बाद पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने स्वयं जिले के सड़क दुर्घटना स्थलों का अध्ययन कराया। नगर पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी जावद एवं मनासा, यातायात पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ कई बैठकों के बाद जिले के 22 अति संवेदनशील सड़क दुर्घटना हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए।


सोच बदलेगी, तो जिंदगी बचेगी
अक्सर दुर्घटना के बाद लोग मदद करने से हिचकिचाते हैं। कोई कानूनी झंझट के डर से पीछे हट जाता है तो कोई जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता है। लेकिन जीवन संजीवनी अभियान यह संदेश देता है कि जब किसी की सांसें अटकी हों, तब सबसे पहली जिम्मेदारी उसकी जान बचाना है।

पुलिस जवान बनेंगे जीवन रक्षक
अभियान के तहत पुलिस जवानों को सीपीआर, प्राथमिक उपचार और दुर्घटना के बाद तत्काल राहत पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही उनका परीक्षण भी लिया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे केवल कानून के प्रहरी नहीं, बल्कि जीवन रक्षक बनकर सामने आएं।

 क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल ?
विशेषज्ञ बताते हैं कि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि इसी समय घायल व्यक्ति को सही सहायता मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि यह अभियान केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।

कागजी कार्यवाही बाद में, जान पहले
जीवन संजीवनी अभियान का सबसे मजबूत संदेश यही है कि किसी घायल व्यक्ति की जिंदगी किसी भी प्रक्रिया से ज्यादा महत्वपूर्ण है। कागज बाद में भर जाएंगे, बयान बाद में दर्ज हो जाएंगे, लेकिन यदि समय निकल गया तो जिंदगी वापस नहीं आएगी।

मानवता का सबसे सुंदर चेहरा
जब कोई पुलिस जवान किसी घायल को सीपीआर देकर उसकी सांसें वापस लौटाने की कोशिश करता है, तब वह सिर्फ अपना कर्तव्य नहीं निभा रहा होता, बल्कि इंसानियत का सबसे सुंदर उदाहरण पेश कर रहा होता है। शायद उसकी कोशिश किसी मां की गोद सूनी होने से बचा दे... किसी बच्चे के सिर से पिता का साया उठने से रोक दे... किसी परिवार की दुनिया बिखरने से बचा ले।

जवासा-भावदमाता चौराहे पर आयोजित
"जीवन संजीवनी अभियान" का पहला कार्यक्रम 12 जून 2026 को नीमच सिटी थाना क्षेत्र के जवासा-भावदमाता हॉटस्पॉट पर आयोजित किया गया। यहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने स्थानीय लोगों, पुलिस जवानों  को सीपीआर (CPR) एवं प्राथमिक उपचार का लाइव प्रशिक्षण दिया।


जीवन संजीवनी अभियान सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक संदेश है— हादसे के बाद भीड़ मत बनो... उम्मीद बनो। तमाशबीन मत बनो... जीवन रक्षक बनो। क्योंकि आपकी एक कोशिश, किसी की पूरी जिंदगी बचा सकती है।

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