पंकज मलिक
06 June, 2026
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एक्सक्लूसिव रिपोर्ट, पंकज मलिक
नीमच। नीमच जिले में इन दिनों एक अनूठी प्रशासनिक पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। 52 सीटर बस में पहली सीट पर कलेक्टर हिमांशु चंद्रा और जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव, जबकि पीछे क्रमवार बैठे जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी। यह दृश्य किसी शैक्षणिक भ्रमण या पिकनिक का नहीं, बल्कि सुशासन की नई परिभाषा गढ़ते प्रशासन का है।
नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा द्वारा शुरू किया गया "जनसंवाद ऑन व्हील्स" अभियान प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम करने का एक अभिनव प्रयास बनकर उभरा है। इस पहल के तहत पूरा जिला प्रशासन एक बस में सवार होकर दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहा है, जहां रात्रिकालीन चौपालों में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी जा रही हैं और उनके निराकरण के लिए मौके पर ही कार्रवाई की जा रही है। उनके साथ इस संवाद में एडीएम बी एस कलेश, डिप्टी कलेक्टर चन्द्रसिंह धार्वे, एसडीएम किरण आँजना, संजीव साहू, प्रीति संघवी साथ थे।
जब पूरा प्रशासन एक बस में निकला गांवों की ओर
आमतौर पर प्रशासनिक दौरे सरकारी वाहनों के लंबे काफिलों, प्रोटोकॉल और सायरनों के बीच होते हैं, लेकिन नीमच में तस्वीर कुछ अलग है। यहां जिला प्रशासन ने अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही बस में सफर करने का निर्णय लिया। इससे न केवल सरकारी खर्च और ईंधन की बचत हो रही है, बल्कि अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और टीम भावना भी विकसित हो रही है।
ग्रामीणों के लिए यह दृश्य किसी आश्चर्य से कम नहीं था कि जिन अधिकारियों से मिलने के लिए उन्हें जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे, वही अधिकारी अब उनके गांव की चौपाल में मौजूद हैं।
ग्रामीणों के द्वार पहुंचा प्रशासन
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीणों को मिला है। जिन समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय जाना पड़ता था, अब उनका समाधान गांव में ही संभव हो रहा है।
रात्रिकालीन चौपालों में सड़क, बिजली, पेयजल, वनाधिकार पट्टे, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की जा रही है। कई शिकायतों का मौके पर ही निराकरण हुआ, जबकि अन्य मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
अप्रैल से शुरू हुआ जनसंवाद का सफर
24 अप्रैल 2026 : ग्राम कोज्या (जावद तहसील)
"जनसंवाद ऑन व्हील्स" की शुरुआत जावद तहसील के ग्राम कोज्या से हुई। लगभग साढ़े तीन घंटे की यात्रा के बाद कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव, एडीएम बी.एस. कलेश, एसडीएम प्रीति संघवी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी गांव पहुंचे और रात्रि चौपाल में ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं।इस शिविर में 25 आवेदन आये और 18 का निराकरण हुआ।
6 मई 2026 : ग्राम टामोटी (मनासा तहसील)
दूसरा जनसंवाद शिविर जनजातीय बाहुल्य ग्राम टामोटी में आयोजित किया गया। लगभग दो घंटे की यात्रा के बाद प्रशासनिक टीम गांव पहुंची और जनसमस्याओं का निराकरण किया। इस दौरान मनासा एसडीएम किरण आंजना भी मौजूद रहीं। शिविर के दौरान अधिकारियों ने समीप स्थित अरावली गौशाला पहुंचकर गोसेवा भी की।इस शिविर में 37 आवेदन आये और 26 का निराकरण हुआ।
19 मई 2026 : ग्राम दलपतपुरा (जीरन तहसील)
तीसरा शिविर अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्राम दलपतपुरा में आयोजित हुआ। यहां विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और निराकरण की दिशा में कार्रवाई की। कार्यक्रम में नीमच एसडीएम संजीव साहू भी उपस्थित रहे। इस शिविर में 49 आवेदन आये और 24 का निराकरण हुआ।
4 जून 2026 : ग्राम खातीखेड़ा (जावद तहसील)
चौथा जनसंवाद शिविर जनजातीय बाहुल्य ग्राम खातीखेड़ा में आयोजित किया गया। लगभग दो घंटे की यात्रा के बाद प्रशासनिक टीम गांव पहुंची। यहां कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही हरिराम के आवास का निरीक्षण किया और ग्रामीण आत्मीयता का परिचय देते हुए अधिकारियों के साथ उनके घर पर पंगत में बैठकर भोजन भी किया। इस शिविर में 18 आवेदन आये और सभी प्रक्रिया में है।
मौके पर समाधान, बढ़ी जवाबदेही
जनसंवाद शिविरों में कई वर्षों से लंबित समस्याओं का निराकरण हुआ। कहीं सड़क निर्माण की मांग पूरी हुई तो कहीं विद्युत आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकला। वनभूमि पट्टों के मामलों की सुनवाई हुई, स्कूल उन्नयन के प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए और कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
इतना ही नहीं, लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को मौके पर ही फटकार लगाकर जवाबदेही भी सुनिश्चित की गई।
ग्रामीणों ने किया आत्मीय स्वागत
गांवों में पहुंची प्रशासनिक टीम का ग्रामीणों ने उत्साह और आत्मीयता के साथ स्वागत किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ संवाद किया, भोजन किया, गौशालाओं का निरीक्षण किया और गांवों की वास्तविक परिस्थितियों को नजदीक से समझा। किसानों ने फसल बीमा, सिंचाई, राजस्व और अन्य स्थानीय मुद्दों को प्रशासन के समक्ष रखा।
ईंधन बचाओ और सुशासन का मॉडल
इस नवाचार को लेकर जब कलेक्टर हिमांशु चंद्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ईंधन बचाओ के सन्देश के तहत यह पहल की गई है। इसका फायदा यह भी मिला है कि सभी अधिकारी कर्मचारियों में सफर के दौरान आपस में अच्छा तालमेल हो रहा है और सौहाद्रपूर्ण वातावरण में सभी अधिकारी,कर्मचारी काम करने को लेकर प्रेरित हो रहे हैं,इसके अलावा दूरस्थ क्षेत्र के अनुभव भी अधिकारी और कर्मचारियों को जमीनी समस्याओं से रूबरू करा रहे है।
इस जन संवाद को लेकर उनके अनुभव के बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह जनसंवाद काफी प्रभावी था,जहां समय की कोई बाध्यता नहीं थी। ग्रामीणों से संवाद अच्छा स्थापित हुआ, सारी वस्तु स्थिति सामने थी और उसके समाधान के भी पुरे प्रयास हुए। ऐसे जनसंवाद का यह फायदा होता है कि फील्ड लेवल पर भी जो कर्मचारी,अधिकारी काम करते हैं उनकी सक्रियता काफी बढ़ जाती है।
एक बस में सवार पूरा जिला प्रशासन, गांवों में रात्रि चौपाल और मौके पर समाधान,नीमच में प्रशासन का यह मॉडल अब सुशासन के एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।
सुशासन की नई मिसाल
एक बस में सवार पूरा जिला प्रशासन, गांवों में रात्रिकालीन चौपाल, ग्रामीणों से सीधा संवाद और मौके पर समाधान,नीमच का यह मॉडल अब केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन की एक नई कार्यशैली के रूप में देखा जा रहा है।
"जनसंवाद ऑन व्हील्स" ने यह साबित कर दिया है कि जब प्रशासन जनता के द्वार तक पहुंचता है, तो समस्याओं का समाधान न केवल तेज़ होता है, बल्कि शासन के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।