न्यूज डेस्क
29 March, 2026
नीमच | भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला अध्यक्ष पद को लेकर नीमच की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल है। संगठन के भीतर 'ताज' को लेकर मची इस खींचतान में तीन प्रमुख नाम चर्चाओं के केंद्र में हैं। तीनों ही धुरंधर अपनी-अपनी बिसात बिछा चुके हैं और शीर्ष नेतृत्व के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। 'द वॉचमैन पोस्ट' की विशेष रिपोर्ट में देखिए कौन है इस रेस में सबसे आगे:
1. रवि पाटीदार: पवन पाटीदार और मनासा की जुगलबंदी
रवि पाटीदार की दावेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ पवन पाटीदार (प्रदेश अध्यक्ष, पिछड़ा वर्ग मोर्चा) का खुला समर्थन है। रवि, पवन जी के बेहद विश्वस्त माने जाते हैं और उनके कार्यकाल में जिला महामंत्री के रूप में संगठन की बारीकियों को समझ चुके हैं। चर्चा है कि पवन पाटीदार खुद प्रदेश स्तर पर रवि के लिए जबरदस्त लॉबिंग कर रहे हैं। रवि को कमान मिलने की संभावना है , क्योंकि उन्हें मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारु का भी पूरा आशीर्वाद प्राप्त है।
2. अनुज चौहान: संगठन का अनुभव और जावद का भरोसा
दूसरे कद्दावर दावेदार अनुज चौहान हैं। ABVP के दौर से ही संगठन में सक्रिय अनुज के पास लंबा सांगठनिक अनुभव है। वर्तमान में वे जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अनुज को जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा का बेहद करीबी माना जाता है। इसके अलावा, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर से उनकी पुरानी और गहरी मित्रता भी उनकी दावेदारी को मजबूती दे रही है। पिछली बार भी वे इस पद के बेहद करीब थे, जिससे इस बार उनकी दावेदारी और भी गंभीर हो गई है।
3. लोकेश चांगल: दिल्ली से भोपाल तक सीधा 'कनेक्शन'
लोकेश चांगल अपनी सक्रियता और हाई-प्रोफाइल संपर्कों के लिए जाने जाते हैं। लोकेश का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय नेता नितिन नवीन से सीधा संवाद बताया जाता है। वे अक्सर दिल्ली और भोपाल के गलियारों में सक्रिय रहते हैं और केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में हैं। स्थानीय स्तर पर विधायक दिलीप सिंह परिहार के साथ उनकी जुगलबंदी जगजाहिर है।
4. या कोई चौंकाने वाला नाम !
भाजपा और खासतौर से नीमच की राजनीति में हमेशा से 'सरप्राइज' का चलन रहा है। जहाँ ये तीनों धुरंधर अपनी पूरी ताकत और रसूख झोंक रहे हैं, वहीं भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए इस संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता कि संगठन किसी ऐसे चौंकाने वाले चेहरे को सामने ले आए जो वर्तमान में चर्चाओं से दूर हो।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हाईकमान 'क्षेत्रीय समीकरण' को प्राथमिकता देगा या 'नेताओं की सिफारिश' को।