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यात्रा हवा में - ओमप्रकाश चौधरी

ओमप्रकाश चौधरी 19 January, 2026

यात्रा हवा में

द वॉचमेन पोस्ट
यात्रा हवा में
✍️ ओमप्रकाश चौधरी

हमारे एक सामाजिक सहयोगी व मित्र हैं ,व्यस्त उद्योगपति हैं फिर भी सामाजिक कार्यों में सक्रीय हैं | अक्सर विमान यात्राएं करते रहते हैं | उन्होंने हवाई यात्रा में बरती जा रही बड़ी लापरवाही पर ध्यान आकर्षित किया |

हममे से कई लोगों का मानना है कि चूँकि विमान यात्रा अक्सर बड़े लोग करते हैं तो वहां कि समस्याओं का भी त्वरित निराकरण हो जाता होगा | लेकिन पिछले दिनों एक एयर लाइन ने जिस तरह से हवाई यात्रा में आराजकता पैदा की, और उसका समाधान करने में हमारी व्यवस्था को एक सप्ताह लग गया|

उससे यह भ्रम भी टूट गया कि विमान यात्रियों की समस्या का समाधान चुटकी बजाते हो जाता है | अर्थात समस्या और उनके समाधान के मामले में भी भारत कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक जैसा है | खैर बात उस समस्या कि करते हैं जहां से हमने बात शुरू की है |

सुरक्षा जांच और वीआईपी संस्कृति

विमान यात्रा में सुरक्षा जांच बहुत कड़ी होती है | दुनिया के चौधरी देश में हवाई यात्रियों की दिगम्बर अवस्था में जांच करने की ख़बरें आती रहती हैं | हमारे यहाँ स्थिति थोड़ी उदार है |

एक समय था कभी शासक रहे परिवार के सदस्य हाल के दिनों तक बिना किसी जांच के विमान तक अपनी कार से चले जाते थे | क्योंकि हमारे यहाँ वीआयपी होना भी स्टेट्स सिम्बल जो है | हालांकि अब उन्हें भी सामान्य यात्री की तरह सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है | सब वक्त वक्त की बात है |

जूते, ट्रे और लापरवाही

इस सुरक्षा जांच में कभी- कभी पहने हुए जूतों भी जाँच के घेरे में आ जाते है | ऐसे में उन जूतों को बाकायदा एक ट्रे में रखकर जांच के लिए ले जाया जाता है | और जब वे जूते वापस आते हैं तो उसी ट्रे में दूसरे यात्रियों के मोबाइल फोन ,पर्स आदि रख कर जाँच के लिए भेजे जाते हैं |

हमारे मित्र ने इसी लापरवाही की तरफ हवाई प्रशासन का ध्यान दिलाया है कि जूते वाली ट्रे में पर्स और मोबाइल रखकर यात्रियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है ? उन्होंने इस समस्या पर हवाई प्रशासन से लेकर मंत्री ,प्रधानमन्त्री तक को लिखा है | अब देखते हैं समाधान कब तक होता है ?

समाजवाद का अद्भुत नमूना

वैसे मेरे हिसाब से यह व्यवस्था समाजवाद का अद्भुत नमूना है जिसमें जूतों , मोबाइल और पर्स आदि सबको एक ही जगह रखा जाता है | इस देश में अब समाजवाद शासन व्यवस्था से तो कब का विदा हो गया है| केवल बचा है तो राजनीतिक दल के नाम में या देश के संविधान में |

संविधान में यह रहे या न रहे इस पर बहस जारी है | जिन्होंने समाजवाद के नाम पर बरसों राज किया वे कहते हैं रहना चाहिए | पर दूसरो का कहना है कि जब यह शासन व्यवस्था से ही गायब हो गया तो संविधान में भी नही रहना चाहिए |

लेकिन यह वह देश है जहाँ बेकार की बातों पर जूतम पैजार चलती रहती है और समस्याएं वहीं की वहीं खड़ी मुंह चिढाती रहती हैं |

हवाई यात्रा और समय की सच्चाई

इस सब को छोडो हम फिर अपनी मूल बात पर आते हैं वह है हवाई यात्रा | इस यात्रा में यही एक जूते और ट्रे की समस्या नही है और भी कई समस्याएं हैं |

देश में यात्रा करना हो तो एक घंटा पहले और विदेश जाना हो तो दो घंटा पहले हवाई अड्डे पर पंहुचना जरुरी है | हवाई अड्डे तक जाने के लिए भी दो-तीन घंटे पहले निकलना होता है |

अपने गंतव्य पर पंहुचने के बाद भी शहर में यातायात से दो चार होना पड़ता है | ऐसे में यह कहना कि हवाई यात्रा से समय बचता है तो वास्तव में समय कितना बचता है इसका हिसाब तो वही लगा सकता है जो विमान यात्रा करता है |

अंतिम बात

यात्रा कोई सी भी हो समस्या हर जगह है | हवाई यात्रा पर और भी कई बातें हैं उनका जिक्र फिर कभी | वैसे हमारे प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि उनका सपना है कि स्लीपर पहनने वाला भी हवाई यात्रा करे | देखें यह सपना कब तक पूरा होता है |

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