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जिला अस्पताल में प्रसूता की संदिग्ध मौत के बाद आक्रोश, फव्वारा चौक पर तीन घंटे तक चक्का जाम - शहर का ट्रैफिक ठप, समझाइश के बाद परिजन शव लेकर हुए रवाना

डेस्क न्यूज 23 November, 2025

नीमच। जिला अस्पताल में प्रसूता टीना मीणा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक हालात तनावपूर्ण बने रहे। मौत की खबर लगते ही परिजन और ग्रामीण उग्र हो गए और मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाते हुए पहले अस्पताल में हंगामा किया और बाद में शव को फव्वारा चौक पर रखकर चक्का जाम कर दिया। करीब तीन घंटे तक शहर का ट्रैफिक पूरी तरह ठप रहा और सभी मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई।

फव्वारा चौक पर उग्र प्रदर्शन, पुलिस बल तैनात
प्रदर्शन के दौरान कई बार हालात विवाद की कगार पर पहुंच गए। सूचना मिलते ही एसडीएम संजीव साहू, तहसीलदार संजय मालवीय, सीएसपी किरण चौहान सहित तीन थानों का भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। अधिकारियों ने परिजनों को समझाइश देकर शांत करने की कोशिश की।
एसडीएम संजीव साहू ने बताया कि परिजन डॉक्टर पर कार्रवाई और मुआवजा की मांग कर रहे हैं, लेकिन यह निर्णय तत्काल प्रशासन स्तर पर संभव नहीं है। परिजनों से लिखित आवेदन लिया गया है और जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन की समझाइश के बाद परिजन शांत हुए और शव लेकर गांव रवाना हुए।

अस्पताल में रात में हंगामा: आईसीयू में तोड़फोड़, स्टाफ बाहर भागा
टीना मीणा की मौत की शुरुआत जिला अस्पताल से हुई, जहाँ परिजनों ने चिकित्सा लापरवाही के आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि मरीज की तबीयत बिगड़ने पर बार-बार बुलाने के बावजूद नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचे। आरोप है कि ब्लड चढ़ाने में गंभीर लापरवाही हुई, जिसके कारण टीना ने कुछ ही मिनटों में दम तोड़ दिया।
मौत की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण आईसीयू में घुस गए और कांच फोड़ते हुए उपकरण तोड़ दिए। हंगामे के दौरान नर्सिंग स्टाफ वार्ड छोड़कर बाहर निकल आया। रात करीब 11:30 बजे प्रभारी टीआई भगत सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे और किसी तरह भीड़ को नियंत्रित किया।

डॉक्टर पर अवैध वसूली का आरोप
परिजनों ने डॉक्टर लाड़ धाकड़ पर इलाज के दौरान 16 हजार रुपए मांगने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि 4,000 और 3,000 रुपए देने के बाद भी सही उपचार नहीं दिया गया। मीणा समाज युवा जिला अध्यक्ष मनोहर रावत ने बताया कि जिला अस्पताल में लंबे समय से लापरवाही और अवैध वसूली की शिकायतें मिलती रही हैं। कई मरीजों को निजी अस्पतालों में कमीशन के लिए रेफर किया जाता है।

डॉक्टर का पक्ष
डॉ. योगेंद्र धाकड़ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा परिजन 9 महीने में पहली बार महिला को अस्पताल लेकर आए थे। तीन दिन तक लगातार उपचार दिया गया। अचानक तबीयत बिगड़ी, जिस पर मेडिकल कॉलेज टीम और जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन महिला को बचाया नहीं जा सका।

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