यशवंत राठौर
25 July, 2025
मनासा। विदीत है की गांधी सागर बांध निर्माण के साथ ही क्षेत्र के सैकड़ों गांवों ने विस्थापन का दर्द झेला। बांध निर्माण में सबसे अधिक भूमि मनासा विधानसभा क्षेत्र की प्रभावित हुई। हजारों हेक्टेयर भूमि डूब गई। क्षेत्र के लोगों को विस्थापन का लाभ नहीं मिला। रामपुरा में गांधी सागर बांध का पानी भरा होने के बावजूद क्षेत्र की जनता सिंचाई व पेयजल के लिए पानी का उपयोग नहीं कर पाई। भूमि प्रभावित होने के बावजूद क्षेत्र के अन्नदाता को पानी का लाभ नहीं मिल पाया था । मगर अब विधायक माधव मारू के प्रयासों से सरकार द्वारा मनासा विधानसभा के अहसानों का बकाया चुकाया जा रहा है.
बता दें कि सन् 1954 में गांधी सागर बांध का निर्माण कार्य शुरू हुआ जो सन् 1960 में जाकर पूरा हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने चंबल नदी पर बने बांध की सन् 1954 में आधारशिला रखी थी। बांध का निर्माण 1960 में पूरा हुआ। जहां एक महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना बनाई गई, जो मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों को बिजली प्रदान करती है। उक्त विद्यूत परियोजना के नवीनीकरण, गांधी सागर बांध की मरम्मत व भराव क्षमता को लेकर मनासा विधायक अनिरुद्ध मारू ने कुछ माह पुर्व विधानसभा में मुद्दा उठाया था । विधायक द्वारा की गई मांग के बाद उठाए गए मुद्दे के बाद विद्यूत संयंत्र के नवीनीकरण, बांध की मरम्मत व भराव क्षमता के लिए सरकार द्वारा 464 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है ।
पूर्व में भी विधायक मारू के प्रयासों से विधानसभा को मिला पानी
उल्लेखनीय है की विधायक अनिरुद्ध मारू ने अपने प्रथम कार्यकाल में गांधी सागर बांध का पानी मनासा को मिले इसके प्रयास शुरू किये और विधान सभा में मुद्दा उठाया। नतीजा मनासा विधानसभा के साथ ही जिले को दो बड़ी योजनाओं की सौगात मिली। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए 1200 करोड़ रुपये की सिंचाई व हर घर नल सहित 1400 करोड की पेयजल योजनाओं की स्वीकृति मिली। जिसका पानी मनासा विधानसभा को अब मिलने जा रहा है।
विधानसभा में उठाया मूद्दा
विधायक मारू ने विधानसभा में विद्यूत संयंत्र की क्षमता बढाने को लेकर मुद्दा उठाया। इसमें विधायक ने सदन को बताया कि बांध के निर्माण के बाद से बहुत से विधायक आए व चले गए लेकिन किसी ने मनासा विधानसभा के विकास व उद्धार को लेकर प्रयास नहीं किए। वर्तमान में गांधी सागर बांध पर 2500 मेगावाट बिजली उत्पन्न हो रही है। जिसका नवीनीकरण कर आधुनिक युग के नवीन टर्बाइन लगाए जाएं ताकि बांध की क्षमता के अनुसार 5000 हजार मेगावाट बिजली उत्पन्न की जा सके। साथ ही बांध की भराव क्षमता व बांध की मरम्मत को लेकर भी उन्होंने अपनी मांग पटल पर रखी । नतीजतन केबिनेट ने विद्यूत संयंत्र की विद्यूत इकाई के नवीनीकरण के लिए 464 करोड़ 55 लाख रुपए की स्वीकृति दे दी है । विद्यूत संयंत्र के नवीनीकरण के बाद क्षेत्र में उर्जा उत्पादन क्षमता में सुधार और ग्रीन एनर्जी उत्पादन में वृद्धि होगी साथ ही लंबे समय के लिए टिकाऊ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिलेगा।
मेरे द्वारा समय-समय पर विधानसभा में कई मुद्दे उठाये गए हैं, जिस पर सदन के माध्यम से संज्ञान लिया जाता रहा है। वहीँ बीते सत्र में गांधी सागर का मुद्दा उठाया गया था। जिस पर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव एवं वित्त मंत्री के द्वारा संज्ञान लिया गया। योजना के लिए राशि स्वीकृत की गई है-अनिरुद्ध मारू-विधायक मनासा
गांधीसागर जल विद्युत गृह की इकाइयों के नवीनीकरण का अनुमोदन
म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत संचालित (5×23) मेगावाट गांधीसागर एवं (4×43 मेगावाट) राणाप्रताप सागर जल विद्युत गृह के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए मध्यप्रदेश द्वारा देय राशि का अनुमोदन प्रदान किया गया।
गांधीसागर जल विद्युत गृह की 5 इकाइयों (5×23 मेगावाट) के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण की पुनरीक्षित अनुमानित लागत 464 करोड़ 55 लाख रुपये का अनुमोदन प्रदान किया गया।राणा प्रताप सागर जल विद्युत गृह की चारों इकाइयों (4×43 मेगावाट) के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण की DPR वर्णित अनुमानित लागत 573 करोड़ 76 लाख रूपये का अनुमोदन प्रदान किया गया।
दोनो परियोजनाओं की स्वीकृति परियोजना राशि पर निर्धारित अंशपूँजी को मध्यप्रदेश एवं राजस्थान राज्य द्वारा 50:50 अनुपात पर वित्त विभाग के परामर्श अनुसार मध्यप्रदेश की हिस्से की राशि 127 करोड़ 6 लाख रुपये को वर्षवार प्रदान किये जाने का अनुमोदन किया गया। मशीनरी बदलने के लिए राशि का व्यय होगा। परियोजना अगले 40 साल के लिए उपयोगी है
दोनों प्रदेश कि विद्युत् उत्पादन कंपनियां अपने-अपने राज्य में स्थित परियोजना का क्रियान्वयन करेगी एवं कार्यों की लागत का लेखा-जोखा पारदर्शी रूप से संधारित कर एक दूसरे से साझा करेंगी तथा मौजूदा प्रथा के अनुसार वितीय खातों का तिमाही/वार्षिक मिलान कर समायोजित करेगी।