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जहां नवजातों का इलाज, वहीं गाली-गलौज और विवाद; जिला अस्पताल की व्यवस्था कटघरे में, महिलाएं आपस में भिड़ी

द वाॅचमेन पोस्ट 18 July, 2026 अन्य

नीमच। जिला चिकित्सालय परिसर में स्थित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) के बाहर अवैध रूप से कपड़ों की दुकान लगाए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो महिलाएं बिना किसी अनुमति के अस्पताल परिसर में दुकान संचालित कर रही हैं। दोनों के बीच ग्राहकों को लेकर आए दिन विवाद और कहासुनी होती है, जिससे अस्पताल का माहौल प्रभावित हो रहा है। मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर में संचालित इन अस्थायी दुकानों को लेकर दोनों महिलाओं के बीच अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। कई बार विवाद इतना बढ़ जाता है कि नौबत मारपीट और अभद्र भाषा के इस्तेमाल तक पहुंच जाती है। घटना के कथित वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। चिंता की बात यह है कि यह विवाद ऐसे स्थान पर हो रहा है, जहां गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का उपचार किया जाता है। चिकित्सकों के लिए शांत वातावरण आवश्यक होता है, वहीं नवजातों के परिजन पहले से ही मानसिक तनाव में रहते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में होने वाला शोर-शराबा और विवाद उपचार व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले की जानकारी अस्पताल प्रशासन और संबंधित पुलिस थाने को पहले से है। दोनों महिलाओं के खिलाफ शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। यह पहली बार नहीं है जब जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी जच्चा-बच्चा वार्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित किए जाने और फोटोग्राफी होने के मामले सामने आ चुके हैं।

सिविल सर्जन ने क्या कहा?

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटील ने बताया कि SNCU वार्ड परिसर में दो महिलाओं द्वारा बिना अनुमति कपड़ों की दुकान लगाई गई है। उन्हें कई बार हटाने का प्रयास किया गया है तथा इस संबंध में थाने में भी शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद महिलाएं दोबारा आकर अतिक्रमण कर लेती हैं और विवाद करती हैं। उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद थाना प्रभारी से चर्चा कर नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी। फिलहाल, अस्पताल परिसर में अतिक्रमण और लगातार हो रहे विवाद को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर अनुशासन, सुरक्षा और शांत वातावरण बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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