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26 साल बाद पेंशनरों को बड़ी राहत, महंगाई राहत पर खत्म होगी ‘आपसी सहमति’ की बाध्यता

द वाॅचमेन पोस्ट 19 July, 2026 अन्य

नीमच | मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को महंगाई राहत (डीआर) के मामले में लंबे समय से चली आ रही विसंगति से बड़ी राहत मिली है। मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा 17 जुलाई 2026 को जारी आदेश के बाद अब महंगाई राहत घोषित करने के लिए दोनों राज्यों की **आपसी सहमति की अनिवार्यता समाप्त** कर दी गई है। इस फैसले से पेंशनरों में खुशी की लहर है। रविवार को नीमच के भारत माता चौराहे पर पेंशनर संघ के सदस्यों ने आतिशबाजी कर मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाई दी।

पेंशनर संघ के अध्यक्ष बालचंद वर्मा ने बताया कि पिछले 26 वर्षों से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को महंगाई राहत देने में दोनों राज्यों की सहमति आवश्यक होने के कारण आदेश जारी होने में महीनों की देरी होती थी। इससे पेंशनरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के विरोध में संघ ने दो वर्ष पूर्व न्यायालय की शरण ली थी। याचिका में सफलता मिलने के बाद अवमानना प्रकरण में भी निर्णय पेंशनरों के पक्ष में आया। न्यायालय के निर्देशों के बाद शासन ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया और अंततः 17 जुलाई को नया आदेश जारी किया गया।

अब प्रत्येक राज्य स्वतंत्र रूप से जारी करेगा आदेश

नए आदेश के अनुसार अब महंगाई राहत घोषित करने के लिए दूसरे राज्य की सहमति लेना आवश्यक नहीं होगा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्य अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से महंगाई राहत का आदेश जारी कर सकेंगे। साथ ही भविष्य में इस संबंध में विधायी संशोधन के बजाय दोनों राज्यों द्वारा कार्यकारी आदेश जारी किए जाएंगे।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी राज्य केंद्र सरकार द्वारा घोषित दर से अधिक महंगाई राहत नहीं देगा और यह व्यवस्था आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी।

केंद्र के साथ ही डीआर मिलने का रास्ता साफ

बालचंद वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की लंबे समय से मांग थी कि केंद्र सरकार जिस दिन महंगाई राहत घोषित करे, उसी दिन से राज्य सरकार भी उसका लाभ पेंशनरों को दे। नए आदेश के बाद इस व्यवस्था के लागू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने बताया कि अब तक 6 से 8 महीने की देरी के कारण पेंशनरों को करीब 81 माह का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि इस मामले से संबंधित प्रकरण अभी न्यायालय में विचाराधीन है और शासन इस नए आदेश को न्यायालय में प्रस्तुत करेगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। इस अवसर पर वी.के. वर्मा, शांतिलाल कारपेंटर, जगमोहन श्रीवास्तव, डॉ. एल.एन. शर्मा, सुजानमल पगारिया, श्याम टांकवाल, जी.एल. जैन, सुरेंद्र गोस्वामी, तेजसिंह राठौड़, दिनेश सोनी, के.के. कठेरिया, बंशीदास बैरागी, पी.एन. गुप्ता, नरेंद्र सोनार, रामनारायण वर्मा सहित बड़ी संख्या में पेंशनर उपस्थित रहे।
 

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