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बुनकरहारा समिति मामला: मनासा अनुविभागीय न्यायालय ने तहसीलदार के नामांतरण आदेश को किया खारिज

डेस्क न्यूज 17 July, 2025

मनासा। बुनकरहारा समिति जमीन के नामांतरण मामले को लेकर 2 वर्ष से अनुविभागीय न्यायालय में चल रहे प्रकरण में एसडीएम मनासा का फैसला आया है। एसडीएम न्यायालय से तहसीलदार द्वारा किए गए नामांतरण आदेश को खारिज कर दिया गया है ।

 मनासा नगर में बस स्टैंड के पास बुनकरहारा समिति के नाम दर्ज करोड़ों की ज़मीन को समिति सदस्यों एवं पदाधिकारीयों द्वारा सहकारिता के नियमों के विपरीत तीन लोगों को  बेंच दिया गया था। कम कीमत और नियम विरुद्ध विक्रय के मामले को लेकर 2 वर्ष पूर्व समिति के सदस्यों द्वरा विरोध और शिकायत होने पर सहकारिता विभाग ने समिति को भंग कर दिया था। उधर रजिस्ट्री होने के बाद तहसील न्यायालय में नामांतरण के लिए आवेदन किया गया। आवेदन के आधार पर तहसीलदार ने जमीन खरीदने वाले दो लोगों के नाम नामांतरण कर दिया। समिति सदस्यों द्वारा अन्य लोगों को बेची जमीन के नामांतरण के खिलाफ अनुविभागीय न्यायालय में सहकारिता विभाग द्वारा अपील की गई थी।  15 जुलाई को अनुविभागीय न्यायालय द्वरा इस नामांतरण को खारिज कर दिया गया। बताया  गया कि सहकारी विभाग के सक्षम अधिकारी की सहमति के बगैर जमीन का अंतरण किया गया। सहकारिता के नियमों के अनुसार कंबल बुनकरहारा समिति को सिर्फ कंबल बेचने और काम करने वालों को रोजगार देने का अधिकार था। जब समिति सदस्यों द्वारा जमीन बेच दी गई। एसडीएम  न्यायालय द्वारा नामांतरण निरस्त होने के बाद जमीन खरीदने वालों में हड़कंप मच गया। मामले में एक नामांतरण में श्रीमति रश्मि पति प्रदीप बसेर, श्रीमति पूनम पति श्रेय मूंदड़ा व दुसरे मामले में डॉ. मनोहर पिता गोपाल गुर्जर क्रेता के रूप में थे और इस मामले में विक्रेता नाथूलाल पिता धूरा हाड़ा और रमेश पिता शिवलाल हाड़ा व अन्य थे।  

एसडीएम मनासा, पवन बारिया ने बताया कि यह संपत्ति पुरानी कंबलहारा बुनकर समिति द्वारा बेची गई थी, जो कि पूर्व में ही भंग हो चुकी थी। इस समिति को केवल कंबल बेचने के लिए बनाया गया था और उन्हें यह संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं था। उसके बावजूद उन्होंने संपत्ति बेची। इसके बाद परिसमापक ने इसको लेकर अपील की थी और इस आधार पर इनके नामांतरण निरस्त कर दिए गए हैं, इसमें काफी वित्तीय निमितताएं भी पाई गई थी, दो नामांतरण किए गए थे। दोनों को खारिज कर दिया गया है। दोनों संपत्तियां बगैर सक्षम अधिकारी की अनुमति के बेच दी गई थी इसलिए इनके नामांतरण आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

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