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ओबीसी आरक्षण में संवैधानिक मूल्यों का नही हो रहा पालन, 13 फीसदी लंबित आरक्षित पदों की शीघ्र नियुक्ति की मांग, प्रदेशभर में ओबोसी छात्रों का प्रदर्शन - सौंपा ज्ञापन 

न्यूज डेस्क 10 July, 2025 सामाजिक

नीमच प्रदेशभर के ओबीसी वर्ग के चयनित छात्रों ने बुधवार को राज्य सरकार के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इसमें 13% आरक्षित पदों की नियुक्ति शीघ्र करने और 87:13 फार्मूले को निरस्त करने की मांग की गई है। छात्रों ने कहा कि यह फार्मूला न केवल संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि विधानसभा द्वारा पारित ओबीसी आरक्षण अधिनियम के भी विरुद्ध है।ज्ञापन में बताया गया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण लागू करने में विधिक और प्रशासनिक स्तर पर भारी चूक हुई। इसके चलते ओबीसी वर्ग को अब तक पूर्ण 27% आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया। वहीं वर्तमान सरकार ने जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक पहल की, जिसकी सराहना की गई है।प्रमुख मांगों में विगत 6 वर्षों से लंबित 13% पदों को शीघ्र भरने, 87:13 फार्मूले को रद्द करने और 27% आरक्षण को पूर्ण रूप से लागू करने की बात कही गई। छात्रों ने कहा कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण पर कोई निषेधात्मक आदेश नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ मामले में स्पष्ट किया है कि 50% से अधिक आरक्षण “फाइनल निर्णय” तक लागू किया जा सकता है।ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रशासनिक आदेश के चलते सैकड़ों ओबीसी चयनित छात्र अब भी नियुक्ति से वंचित हैं, जिससे उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। छात्रों ने सरकार से आग्रह किया कि वह प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखाकर इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करे और ओबीसी युवाओं को उनका संवैधानिक हक दिलाए।ज्ञापन के अंत में सरकार के जातीय आंकड़ों और सामाजिक न्याय हेतु किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए, जल्द निर्णय की उम्मीद जताई गई।

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