यशवंत राठौर
29 June, 2025
मनासा। दुनिया मे भारत ही ऐसा देश है जहाँ जन-मानस विभिन्न प्रकार से बेजुबान जीवों की सेवा में लगा रहता है, अनेको पशुप्रेमी संस्थाएं देश में कार्यरत हैं। मनासा में भी इसी तर्ज पर कुछ युवाओं ने भीषण गर्मी के दिनों में वानरों की स्थिती समझते हुए बंदरो के भोजन की व्यवस्था करने की ठानी। मनासा से लगभग 55 किलोमीटर दूर केदारेश्वर नाम से प्रसिद्ध एक बहुत ही प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ पर पर्याप्त मात्रा में वानर सेना है।
प्रत्येक रविवार को बाटी संघ के सदस्य वहां जाते है और वहीं सब मिलकर बंदरो के लिए भोजन तैयार करते हैं। शुरू में संख्या थोड़ी कम रहती थी परन्तु अब धीरे-धीरे बंदरो की संख्या भी बढ़ रही है। पर्यटन स्थल होने के कारण बारिश के मौसम में सैलानियों का भी तांता लगा रहता है। अनेकों परिवार यहां बारिश में मौसम में परिवार संग आकर यहीं भोजन बनाकर केदारेश्वर भगवान को भोग लगाकर प्रसादी ग्रहण करते हैं। प्रकृति की गोद मे बैठे भगवान पर यहां सीधे झरने द्वारा जलाभिषेक भी होता है।
संघ सदस्य सुनील छाबड़ा ने बताया कि हमने यह सेवा मूल रूप से गर्मियों के लिए शुरू की थी, बरसात में तो प्रकति भी जीवों पर मेहरबान रहती है, परन्तु अब हमें आदत सी हो गई है,
इस काम में सहयोगी के रूप में बंदरबांटी संघ मनासा सुनिल छाबड़ा, हेमंत शर्मा (गुरु), विजय व्यास (बिल्लू), संजय उपाध्याय, कान्हा राठौर, बंशी लाल जैन, पूनम चंद कहार, नीलू वाधवा, हरीश बाजपेई, भरत द्विवेदी, दीपक पानेरी, रामचंद्र माली, मनीष परिहार, अजय पराशर, विजेश गेहलोद और अरविंद नागदा सहित की मित्र रहते हैं। इस पुनीत कार्य में सामाजिक तोर पर भी आर्थिक सहयोग मिल जाता है जिसके कारण सेवा कार्य मे कोई बाधा नही आती है।