डेस्क न्यूज़
27 July, 2026
सामाजिक
नीमच। शहर की प्रमुख साहित्यिक संस्था कृति द्वारा आयोजित जिला स्तरीय पावस कवि गोष्ठी का आयोजन साहित्य, देशभक्ति और समसामयिक विषयों की गूंज के बीच संपन्न हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता आरोग्य भारती नीमच के अध्यक्ष पारस जैन ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ पारस जैन एवं उनकी धर्मपत्नी सुलोचना जैन द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। संस्था अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने अतिथियों, कवियों एवं श्रोताओं का स्वागत किया।
गोष्ठी का मुख्य विषय देश की वर्तमान परिस्थितियां एवं वर्षा ऋतु रहा। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों पर विचार व्यक्त किए, वहीं बारिश और प्रेम पर आधारित रचनाओं ने भी श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सत्येंद्र सक्सेना ने वर्षा ऋतु और कारगिल विजय दिवस पर आधारित कविता से की। श्याम चौहान ने समय की शक्ति को अपनी कविता का विषय बनाया। राधेश्याम शर्मा ने सत्ता और कलम के संबंधों पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि कलम तभी सत्ता का गुणगान करती है, जब वह जनहित के प्रति समर्पित हो।
रेणुका व्यास ने नेताओं के बदलते व्यवहार पर व्यंग्य प्रस्तुत किया, जबकि किशोर जेवरिया ने सत्ता के लिए बदलती आस्थाओं पर कटाक्ष करते हुए वर्षा ऋतु और प्रकृति पर भी भावपूर्ण कविता सुनाई। विजय बैरागी ने व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर अपनी रचनाओं के माध्यम से विचार रखे। गीतकार धर्मेंद्र शर्मा ने समय, रिश्तों और जीवन के बदलते पड़ावों पर आधारित गीत प्रस्तुत किए। वरिष्ठ कवि निरंजन गुप्त 'राही' ने अपनी गजल के माध्यम से जीवन, उम्मीद और समाज की विसंगतियों को स्वर दिया। गोष्ठी का संचालन सविता चौधरी ने किया, जिन्होंने अपनी काव्य पंक्तियों से पूरे आयोजन को सरस बनाए रखा।
समापन सत्र में अध्यक्ष पारस जैन ने अपनी कविता के माध्यम से देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए युवाओं से किसी भी आंदोलन या विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और पृष्ठभूमि को समझने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में पारस जैन, सुलोचना जैन, ओमप्रकाश चौधरी, रघुनंदन पाराशर एवं निरंजन गुप्त 'राही' ने कृति संस्था के सदस्यों की विवरणिका का लोकार्पण किया। संस्था के सचिव रघुनंदन पाराशर ने सभी कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। गोष्ठी में नरेंद्र पोरवाल, सत्येंद्र राठौर, प्रकाश भट्ट, शरद पाटीदार, मुकेश कासलीवाल, राजेश जायसवाल, नीरज पोरवाल, कमलेश जायसवाल, दर्शनसिंह गांधी, भरत जाजू, श्याम टांकवाल, जीवन कौशिक, गणेश खंडेलवाल, जगमोहन कटारिया, उमरावसिंह गुर्जर सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं सुधि श्रोता उपस्थित रहे।