डेस्क न्यूज
21 July, 2026
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-दिल्ली में छात्रों के खून से लिखा गया लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय
-लाठियों से सिर फोड़ना और बेटियों को सड़कों पर घसीटना देश पर कलंक, सत्ता के अहंकार में अंधी सरकार के खिलाफ अब देश में आर-पार की जनक्रांति !
नीमच | जिन बेटियों और नौजवानों के सिर फोड़े गए हैं, क्या वे इस देश की संतानें नहीं हैं? क्या वे भारत माता के बच्चे नहीं हैं? आखिर अपने ही नागरिकों और मासूम बच्चों पर कोई सरकार ऐसी बर्बरता कैसे कर सकती है ? आखिर अपना हक़ ही तो मांग रहे थे।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने दिल्ली में परीक्षा धांधली और पेपर लीक घोटालों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे देश के भविष्य हमारे निर्दोष युवाओं, छात्रों और बेटियों पर मोदी सरकार के इशारे पर जिस तरह बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाई गईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और बच्चियों को सड़कों पर घसीट-घसीट कर पीटा गया, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा की जंतर-मंतर से संसद मार्च के लिए निकले शामिल प्रदर्शनकारियों पर मचाए गए इस खूनी तांडव को लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला और शर्मनाक अध्याय हैं।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष बाहेती ने दिल्ली में किए गए लाठी चार्ज की गहरी आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली की सड़कों पर उतरे लड़के-लड़कियां कोई अपराधी या आतंकवादी नहीं हैं और न ही वे कोई भीख मांग रहे हैं। वे केवल निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था का अपना मौलिक अधिकार मांग रहे हैं। लेकिन सरकार ने जबरन उन्हें रोकने, बैरिकेड खड़े करने और पुलिस व बिना नेमप्लेट वाले 'अज्ञात' गुंडों से लाठियां बरसवाकर साफ कर दिया है कि उसे संविधान की कोई परवाह नहीं है।
बाहेती ने कहा कि RAF और पुलिस बल का इस्तेमाल आम नागरिकों और छात्रों के खिलाफ करना पूरी तरह अमानवीय और अस्वीकार्य है। सुरक्षा बलों का काम जनता की रक्षा करना है, न कि सत्ता के अहंकार की खातिर उनकी आवाज कुचलना। लाठीचार्ज से आंदोलन को कुचलने का वहम पालने वाली सरकार यह समझ ले कि युवाओं के बहते खून ने देश में नई जनक्रांति का बिगुल बजा दिया है।
बाहेती ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि परीक्षा धांधली और पेपर लीक के मानसिक तनाव व अवसाद के कारण 22 से अधिक मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है और कई युवाओं ने आत्महत्या कर ली, लेकिन इसके बावजूद इस अमानवीय सरकार का दिल नहीं पसीजा।सरकार की नाकामी ने मासूमों की जान ली हैं। लगातार पेपर लीक होना और लाखों युवाओं की जिंदगी बर्बाद होना सरकार की सबसे बड़ी विफलता है, लेकिन अपने बेजा अहंकार के चलते मोदी सरकार ने एक मंत्री का इस्तीफा तक नहीं लिया।
56 इंच की छाती' का दंभ, पर पीड़ितों से बात करने की हिम्मत नहीं-
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अहंकार इतना बड़ा है कि वे आज तक पीड़ित छात्रों से सीधे बैठकर बात करने तक को तैयार नहीं हैं। इतने बड़े घोटालों के बाद भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बेशर्मी से अपने पद पर चिपके हुए हैं, जिन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। बाहेती ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मानसून सत्र के पहले ही दिन जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी ने राज्यसभा में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया, तो सरकार ने जवाब देने के बजाय सदन की कार्यवाही ही स्थगित करवा दी। यह साबित करता है कि यह सरकार जनता के सवालों से भागती है।
संस्थाओं पर कब्जा और नफरत की राजनीति-
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने कहा कि आज चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई, न्यायपालिका जैसी स्वतंत्र संस्थाओं को बंधक बनाकर तानाशाही चलाई जा रही है। धर्म के नाम पर लड़ाने वाली राजनीति का पर्दाफाश हो चुका हैं। बाहेती ने कहा कि हमारे शीर्ष नेता राहुल गांधी जी, प्रियंका गांधी जी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी ने इस जुल्म के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई है और पूरा विपक्ष आज इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ा है।
प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं से अपील
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने देश के आम युवाओं, छात्रों, बुद्धिजीवियों और प्रबुद्धजनों से भावुक और पुरजोर अपील की है कि वे आगे आएं और सरकार के हर गलत काम, अन्याय और तानाशाही के खिलाफ मजबूती से अपनी आवाज उठाएं। जब देश के बच्चों का भविष्य खतरे में हो, तब चुप रहना अपराध है इसलिए प्रबुद्ध वर्ग सरकार को उसकी नैतिक जवाबदेही याद दिलाने के लिए युवाओं के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो। जनता इस अहंकार का मुंहतोड़ जवाब जरूर देगी।
बाहेती ने कहा की कांग्रेस की मांग है
घायल प्रदर्शनकारियों को तत्काल उचित इलाज और मुआवजा दिया जाए। साथ ही लाठीचार्ज के आदेश देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो। नीट पेपर लीक में हुई मौतों की जिम्मेदारी तय हो और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त किया जाए। कांग्रेस ने मांग करी की सरकार संसद में इस मुद्दे पर खुली चर्चा कराए और बहस से भागना बंद करे और सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का सम्मान करे और दमनकारी नीति तुरंत बंद करे।