डेस्क न्यूज़
29 June, 2026
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रतलाम। आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग और उत्कृष्ट कार्यप्रणाली के दम पर रतलाम पुलिस ने पूरे मध्य प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के प्रभावी संचालन में वर्ष 2025 के दौरान रतलाम पुलिस ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (एससीआरबी), पुलिस मुख्यालय द्वारा भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे मिंटो हॉल में आयोजित इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) विषयक राज्य स्तरीय कार्यशाला में सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना, न्यायमूर्ति संजीव कालगांवकर, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) नई दिल्ली तथा साइबर शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
आईसीजेएस के पांचों स्तंभों में बेहतर समन्वय
रतलाम जिले में न्यायालय, पुलिस, स्वास्थ्य, अभियोजन, फॉरेंसिक तथा जेल विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए तकनीकी समिति का गठन किया गया है। समिति प्रत्येक माह नियमित बैठक आयोजित कर ई-समन, ऑनलाइन एमएलसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट (पीएम) और ई-प्रोसिक्यूशन से जुड़े मामलों की समीक्षा करती है तथा तकनीकी समस्याओं का रियल-टाइम समाधान सुनिश्चित करती है।
इसके अलावा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों के बीच व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से निरंतर संवाद की व्यवस्था की गई है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज और प्रभावी हुआ है।
डिजिटल सिस्टम से न्यायिक प्रक्रिया हुई तेज
पिछले 15 महीनों की सीसीटीएनएस रैंकिंग में रतलाम जिला रिकॉर्ड 9 बार प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर चुका है। पहले वारंट की तामीली और केस डायरी न्यायालय तक पहुंचाने में जहां 2 से 3 दिन का समय लगता था, वहीं अब ई-सर्विस प्रणाली के माध्यम से यही प्रक्रिया 30 से 40 मिनट में पूरी हो रही है।
पहले पुलिसकर्मियों को केस डायरी लेकर स्वयं न्यायालय जाना पड़ता था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए एक क्लिक में केस डायरी सीधे न्यायालय तक पहुंचाई जा रही है। इससे लगभग 80 प्रतिशत समय की बचत हो रही है और न्यायिक प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज एवं पारदर्शी बनी है।
डिजिटल विवेचना और एआई तकनीक से अपराधियों पर शिकंजा
पिछले डेढ़ वर्ष में जिले में 2,036 एमएलसी, 869 पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा 19 हजार से अधिक ई-समंस एवं वारंट ऑनलाइन जारी किए जा चुके हैं। विवेचना को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए 320 जांच अधिकारियों को आधुनिक टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। इनके माध्यम से अधिकारी घटनास्थल पर ही फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य संकलित कर सीधे मुख्य सर्वर पर अपलोड कर रहे हैं। अब तक 9 हजार से अधिक डिजिटल विवेचनाएं पूरी की जा चुकी हैं।
रतलाम पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ई-रक्षक ऐप के फेस रिकग्निशन फीचर का भी प्रभावी उपयोग कर रही है, जिससे संदिग्धों और अपराधियों की पहचान तेजी से की जा रही है। वहीं, सरकारी संदेश ऐप के जरिए अधिकारियों के बीच होने वाला संवाद, पीडीएफ दस्तावेज, वीडियो और केस से जुड़ी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित सरकारी सर्वर पर संरक्षित रहती है।
रतलाम पुलिस की यह उपलब्धि प्रदेश में डिजिटल पुलिसिंग, आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग और तेज न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।