डेस्क न्यूज़
25 June, 2026
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नीमच। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली द्वारा कलाव्योम फाउंडेशन एवं रंगाभास नाट्यशाला के सहयोग से शहर के फ्यूचर प्राइड स्कूल में 30 दिवसीय निःशुल्क चिल्ड्रेन थिएटर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस विशेष कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों से चयनित प्रतिभाशाली बच्चे भाग ले रहे हैं। आगामी 24 जुलाई तक चलने वाली इस कार्यशाला में बच्चों को रंगमंच की विविध विधाओं का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
कार्यशाला का संचालन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक एवं अनुभवी रंगकर्मी सुशीलकांत मिश्रा के निर्देशन में किया जा रहा है। वहीं प्रशिक्षक सावित्री मिश्रा बच्चों को अभिनय, संवाद-अभिव्यक्ति, मंच अनुशासन, शरीर और स्वर के प्रभावी उपयोग, समूह कार्य, रचनात्मक सोच तथा नाट्य प्रस्तुतियों की तकनीकों का प्रशिक्षण देंगी। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को खेल-खेल में थिएटर की बुनियादी समझ विकसित कराई जाएगी, जिससे उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास का भी विकास होगा।
कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कलाव्योम फाउंडेशन के अध्यक्ष अशोक श्रीमाल ने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त साधन भी है। उन्होंने कहा कि थिएटर बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता विकसित करता है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्था के सहयोग से आयोजित यह कार्यशाला बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की रंगमंचीय प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश बच्चे मोबाइल और डिजिटल माध्यमों में अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं। ऐसे में थिएटर जैसी रचनात्मक गतिविधियां बच्चों को वास्तविक जीवन से जोड़ने, उनकी कल्पनाशक्ति को विकसित करने और उन्हें सकारात्मक दिशा प्रदान करने का कार्य करती हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं समाजसेवी सुखलाल पवार ने अपने संबोधन में कहा कि कला और संस्कृति किसी भी समाज की पहचान होती है। बच्चों में सांस्कृतिक चेतना का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि थिएटर बच्चों को अनुशासन, सामूहिकता, सहयोग और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाता है। ऐसे प्रशिक्षण शिविर बच्चों को अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें मंच प्रदान करने का अवसर देते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, कलाव्योम फाउंडेशन एवं रंगाभास नाट्यशाला द्वारा किए जा रहे इस प्रयास की सराहना की।
कार्यशाला के निर्देशक सुशीलकांत मिश्रा ने प्रतिभागी बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि थिएटर सीखने की प्रक्रिया आनंद, अनुभव और अभिव्यक्ति पर आधारित होती है। आगामी 30 दिनों में बच्चे अभिनय के साथ-साथ मंच सज्जा, चरित्र निर्माण, कहानी को मंच पर जीवंत बनाने की कला और समूह में कार्य करने की विधियों से भी परिचित होंगे। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल एक नाटक तैयार करना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर रचनात्मकता, आत्मविश्वास, संवाद कौशल और संवेदनशीलता का विकास करना है।
कार्यक्रम का संचालन राजेश सोलंकी ने किया। उन्होंने कार्यशाला की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण बच्चों को कला के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करेगा और उनके सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा।
अंत में उमेश किलोरिया ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, अभिभावकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग से यह कार्यशाला सफल होगी और बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागी बच्चे, उनके अभिभावक, कला प्रेमी एवं रंगमंच से जुड़े लोग उपस्थित रहे। कार्यशाला का समापन 24 जुलाई को होगा, जहां बच्चों द्वारा तैयार किए गए नाटक का सार्वजनिक मंचन किया जाएगा। इस प्रस्तुति में प्रतिभागी अपने प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल का प्रदर्शन करेंगे और दर्शकों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा से रूबरू कराएंगे।