डेस्क न्यूज़
20 June, 2026
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रामपुरा/नीमच। रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम सालरमाला निवासी युवती जानीबाई की रहस्यमयी गुमशुदगी का बेहद खौफनाक और दर्दनाक अंत हुआ है। गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कारवाई और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर नीमच-झालावाड़ मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी की, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
पिता ने बस में बैठाया था, रास्ते से ही हो गई गायब
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सालरमाला निवासी गोपाल पिता लिंबाजी ने 12 जून को अपनी पुत्री जानीबाई को उसके ससुराल रावतभाटा भेजने के लिए बस में बैठाया था। पिता ने बकायदा रावतभाटा तक का टिकट दिलवाकर बस कंडक्टर को बेटी को सुरक्षित उतारने की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। सफर के दौरान गांधीसागर तक तो जानीबाई से परिजनों का मोबाइल पर संपर्क बना रहा, लेकिन उसके बाद अचानक उसका फोन बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह टूट गया।
ससुराल पक्ष से संपर्क करने पर जब पता चला कि जानीबाई वहां पहुंची ही नहीं है, तो परिजनों के होश उड़ गए। उन्होंने रावतभाटा और आसपास के तमाम इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
सीसीटीवी में दिखा संदिग्ध 'बल्लू', पुलिस ने नहीं की पूछताछ !
परिजनों ने बताया कि बेटी की तलाश के दौरान जब स्वयं अपने साथीयों के साथ पिता गोपाल ने गांधीसागर क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो उसमें गांव का ही एक युवक बल्लू अपनी मोटरसाइकिल से जानीबाई की बस का पीछा करता हुआ दिखाई दिया। इस पुख्ता साक्ष्य के आधार पर परिजनों ने 13 जून को ही रामपुरा थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाकर बल्लू पर हत्या या अपहरण की आशंका व्यक्त की थी। परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि पुलिस ने समय रहते उनकी सुचना और आशंका पर ध्यान नहीं दिया। यदि शिकायत के तुरंत बाद संदिग्ध बल्लू को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की जाती, तो शायद आज उनकी बेटी जीवित होती।
जंगल में मिला कंकाल, कपड़ों और पायजेब से हुई पहचान
गुमशुदगी के सात दिन बाद, 19 जून को पुलिस परिजनों को गांधीसागर के समीप जंगल में एक सुनसान स्थान पर ले गई। वहां पुलिस को एक मानव कंकाल, कुछ कपड़े और एक पैर की पायजेब (पायल) बरामद हुई थी। माना जा रहा है कि यह लापता जानीबाई का ही कंकाल है, मौके पर मौजूद बदहवास पिता और परिजनों ने कपड़ों व पायजेब को देखकर उसकी पहचान अपनी लापता बेटी जानीबाई के रूप में की है । जंगल में कंकाल मिलने की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई और परिजनों का सब्र टूट गया।
सड़क पर उतरा जनआक्रोश, अधिकारियों ने दिया आश्वासन
शनिवार को चक्काजाम प्रदर्शन के दौरान मृतका के पिता गोपाल ने रोते हुए कहा कि, "पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली ने मेरी बेटी की जान ले ली। समय पर कार्रवाई होती तो मेरी बेटी बच जाती।" ग्रामीणों का कहना है कि अगर ऐसी जघन्य वारदातों पर पुलिस समय रहते सख्त कदम नहीं उठाएगी, तो आम जनता का कानून व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा।
चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीओपी निकिता सिंह, मनासा थाना प्रभारी निलेश अवस्थी व अन्य अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की और उन्हें निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मामले की गहनता से जांच की जा रही है, और इस हत्याकांड में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस की कई टीमें संदिग्धों की धरपकड़ में जुटी हैं।
एसडीओपी निकिता सिंह ने बताया कि मामलें में एक युवक को राउंड अप किया गया है, पुरे मामले की जांच कर उचित कारवाई की जायेगी
हालांकी मामले में कई सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब पुलिस को देना है, जैसे हत्याकांड कब और किन परिस्थितीयों में अंजाम दिया गया ? शव की अवस्था के अनुसार मात्र 5-6 दिनों में कंकाल जैसी स्थिती कैसे हुई? पुलिस ने परिजनों कि रिपोर्ट के बावजूद कारवाई में देरी क्यों की ? सीसीटीवी फुटेज 13 तारीख को ही पुलिस को सौंपे जा चुके थे तो 19 तारीक को शव मिलने तक पुलिस ने क्या किया ?