डेस्क न्यूज
05 June, 2025
नीमच। आज के दौर में जहां लोग अपने स्वार्थ के लिए बेतहाशा पेड़ों की कटाई में लगे हुए हैं वहीं नीमच के कुछ पर्यावरण प्रेमियों ने बेरहमी से काट दिए गए पेड़ को नया जीवन दे दिया। पर्यावरण प्रेमियों ने अपने किसी परिजन की तरह एक वृक्ष का उपचार करने का प्रयोग किया और सचमुच उसे नया जीवन देने में सफल रहे।
जमीन पर एक फुट ऊपर से काट दिया था पेड़
6 माह पूर्व एक पेड़ जिसे अलस्टोनिया के नाम से जाना जाता है। इस पेड़ को नीमच नगर पालिका के कुछ कर्मचारीयों द्वारा बेरहमी से काट दिया गया था। 25 वर्ष पूर्व रोपित यह वृक्ष अपने शबाब पर था और लहलहा रहा था। लेकिन नपा कर्मियों ने इसे जमीन से एक फुट छोड़ कर काट दिया। इस तरह काट दिए गए पेड़ का ऊपरी भाग तने और टहनियों सहित सड़क पर आ गिरा। पिछले वर्ष 12 दिसंबर 2024 को एलआईसी रोड पर स्थित पूजा मेडीकोज के सामने पेड़ काटने की शिकायत पूर्व पार्षद डॉ.पृथ्वीसिंह वर्मा द्वारा जिम्मेदारों को की गई मगर कोई हल नहीं निकला।
पेड़ को नया जीवन देने लिया संकल्प

पेड़ काटे जाने की बात श्री वर्मा द्वारा संकल्प पर्यावरण संस्था के वृक्ष मित्र जगदीश शर्मा से साझा की गई। उस कटे हुए पेड़ को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता तो वह मात्र ठूंठ ही रह जाता। पर्यावरण प्रेमी तथा वृक्ष मित्र जगदीश शर्मा, डॉ.पृथ्वीसिंह वर्मा, भगत वर्मा, पुनीत वर्मा, पीयूष शर्मा व अर्जुन बैरागी आदि साथियों ने मिलकर उस एक फुट के ठूंठ को नया जीवन देने का संकल्प लिया। निश्चय किया गया की इस पेड़ में फिर से जान डालनी है और कम समय में इसे फिर से हरा-भरा रूप देना है।
इस तरह की गई पेड़ की सर्जरी
पेड़ को नया जीवन देने के लिए पेड़ के कट चुके ऊपरी भाग को जमीन में रह गए ठूंठ पर ज्यों का त्यों एक लोहे की पत्ती के सहारे रख दिया गया। साथ ही गोबर और आयुर्वेदिक दवाओं का लेप भी इस पर लगाया गया। उसके बाद इस पर पट्टी बांधी गई। बाकायदा किसी अस्थि विशेषज्ञ की तरह एक तरह से ज्वॉइन्ट जोड़ कर इस पेड़ पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया। लगातार इसकी देख-रेख भी की गई ।
दो भागों में कट कर अलग हो चुके पेड़ को मिला नया जीवन

इस प्लास्टर के मात्र 6 माह में ही आज पर्यावरण दिवस पर पेड़ का ऊपरी तना निचले ठूंठ से पूरी तरह जुड़ गया है। इसका सबूत है पेड़ के ऊपरी हिस्से पर फिर से पतली-पतली नई शाखाएँ निकल आई हैं। इन टहनियों पर छोटी-छोटी हल्के हरे रंग की सेकड़ों पत्तियां तने के ऊपरी हिस्से में उग आई हैं जो बताती है की वृक्ष को नया जीवन मिल गया है। नगरपालिका नीमच द्वारा बेरहमी से काट दिए गए पेड़ की पर्यावरण प्रेमियों ने सर्जरी कर दी। पूरी तरह काट दिया गया पेड़ उपचार के बाद फिर से चल निकला और जी गया।
पर्यावरण प्रेमियों के वृक्ष प्रेम और संवेदनशीलता पर ‘द वॉचमेन पोस्ट’ की और से ह्रदय से अभिनंदन।
अलस्टोनिया स्कॉलरिस भी कहा जाता है
अलस्टोनिया स्कॉलरिस भारत के पश्चिम बंगाल का राजकीय वृक्ष है, जहाँ इसे छतिम वृक्ष कहा जाता है। दीक्षांत समारोह के दौरान अलस्टोनिया स्कॉलरिस (सप्तपर्णी) की पत्तियाँ विश्वभारती विश्वविद्यालय के स्नातकों और स्नातकोत्तर स्कालर्स को कुलपति द्वारा प्रदान की जाती है, जिन्हें भारत के प्रधान मंत्री द्वारा कुलपति को प्रदान किया जाता है।