डेस्क न्यूज
08 June, 2026
सामाजिक
वर्षाकाल में ‘पौधे बचाओ अभियान’ शुरू करने का आह्वान, पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील
नीमच। वर्षाकाल में होने वाले पौधारोपण कार्यक्रमों के साथ-साथ रोपे गए पौधों को जीवित रखने की दिशा में भी गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। यह बात संकल्प पर्यावरण मित्र संस्था के संस्थापक एवं पर्यावरण मित्र जगदीश शर्मा ने प्रेस नोट जारी कर कही।
उन्होंने कहा कि जिले में प्रतिवर्ष शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न शासकीय-अशासकीय विभागों द्वारा बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाता है। यदि पिछले दस वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में लाखों पौधे लगाए गए होंगे तथा इस पर करोड़ों रुपए भी खर्च हुए होंगे, लेकिन अपेक्षित हरियाली आज भी दिखाई नहीं देती। इससे स्पष्ट है कि पौधारोपण के बाद पौधों की सुरक्षा और देखभाल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
शर्मा ने कहा कि मनासा की पर्यावरण मित्र संस्था, नीमच की संकल्प पर्यावरण मित्र संस्था सहित कुछ अन्य संगठन ऐसे हैं जो रोपे गए पौधों को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं और सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। यदि लगाए गए पौधों में से 50 प्रतिशत पौधे भी संरक्षित कर लिए जाएं तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने कहा कि अक्सर पौधारोपण कार्यक्रम एक-दो माह तक चर्चा में रहते हैं, लेकिन बाद में पौधे लावारिस छोड़ दिए जाते हैं। परिणामस्वरूप पशुओं द्वारा उन्हें नुकसान पहुंचाया जाता है या फिर पानी और सुरक्षा के अभाव में वे सूख जाते हैं। ऐसे में पौधारोपण अभियान तभी सफल माना जाएगा जब रोपे गए पौधे विकसित होकर वृक्ष बन जाएं।
जगदीश शर्मा ने जिले में पेड़ों की अवैध कटाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में नीमच शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर बिना अनुमति बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है। इस संबंध में पर्यावरण प्रेमियों द्वारा कई बार ज्ञापन दिए गए, जिनकी प्रतिलिपियां प्रधानमंत्री कार्यालय और मध्यप्रदेश शासन तक भेजी गईं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
उन्होंने बताया कि महू-नसीराबाद मार्ग पर पर्यावरण प्रेमियों द्वारा विकसित की गई ग्रीन बेल्ट तथा जिला पंचायत भवन के सामने लगाए गए फलदार और छायादार पौधों की हरियाली इस बात का उदाहरण है कि यदि पौधों की उचित देखभाल की जाए तो सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।
अंत में उन्होंने जिलेवासियों से वर्षाकाल में पौधारोपण के साथ-साथ ‘पौधे बचाओ अभियान’ का हिस्सा बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, संतुलित और सुरक्षित पर्यावरण देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।