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जिस पेड़ को मौत के हवाले कर दिया गया था, उसे फिर से जिंदा कर दिखाया नीमच के वृक्ष मित्रों ने

डेस्क न्यूज़ 05 June, 2026 अन्य

नीमच। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहर में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश करने वाले वृक्ष मित्रों का सम्मान किया गया। सड़क निर्माण के दौरान काटकर गिरा दिए गए सप्तपर्णी (बौद्ध वृक्ष) को पुनर्जीवित करने वाले पर्यावरण प्रेमी जगदीश शर्मा एवं उनके सहयोगियों को डॉ. पृथ्वीसिंह वर्मा परिवार द्वारा सम्मानित किया गया।

पर्यावरण प्रेमी भगत वर्मा ने बताया कि विकास कार्यों के दौरान अक्सर हरे-भरे वृक्षों की अनदेखी की जाती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एलआईसी कार्यालय के पीछे स्थित एक हरा-भरा सप्तपर्णी वृक्ष सड़क निर्माण के दौरान काटकर धराशायी कर दिया गया था। इस घटना से आहत वर्मा परिवार ने वृक्ष को बचाने और पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया तथा इसकी जिम्मेदारी पर्यावरण मित्र जगदीश शर्मा को सौंपी।

जगदीश शर्मा ने अपने सहयोगियों पुनीत वर्मा, पियूष शर्मा और अर्जुन बैरागी के साथ मिलकर वृक्ष के उपचार का कार्य शुरू किया। कटे हुए तने को लोहे की पट्टियों से जोड़कर उसके घावों पर गाय के गोबर का लेप लगाया गया तथा नियमित देखभाल की गई। उनकी अथक मेहनत का परिणाम यह रहा कि कुछ ही महीनों में वृक्ष पर नई कोंपलें निकलने लगीं और आज एक वर्ष बाद वही वृक्ष फिर से हरा-भरा होकर जीवन का संदेश दे रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वृक्ष की पूजा-अर्चना की गई तथा जगदीश शर्मा एवं उनके साथियों को दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में समाजसेवी डॉ. पृथ्वीसिंह वर्मा, किशोर जैवरिया, प्रकाश भट्ट, भगत वर्मा, हरीश उपाध्याय एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य विजय सेन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि यह पुनर्जीवित वृक्ष समाज को संदेश दे रहा है कि यदि इच्छाशक्ति और समर्पण हो तो प्रकृति को नया जीवन दिया जा सकता है। कार्यक्रम में सभी ने पर्यावरण संरक्षण और अधिकाधिक वृक्षारोपण का संकल्प लिया।

"पेड़-पौधे मत करो नष्ट, सांस लेने में होगा कष्ट" का संदेश देते हुए पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया गया।

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