महेंद्र सिंह राठौड़
31 May, 2026
सिंगोली। समाज में अब 'नेत्रदान-महादान' के महत्व को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। लोग चाहने लगे हैं कि मृत्यु के बाद भी वे किसी के काम आ सकें। इसी सोच के साथ मरणोपरांत नेत्रदान की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। नेत्रदान को सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि एक व्यक्ति की आंखों से दो जिंदगियां रोशन होती हैं। जो जन्म से अंधेरे में जी रहा है, उसकी आंखों में उजाला लौट आए, इससे बड़ा पुण्य भला क्या होगा!
ऐसा ही एक अनुकरणीय और प्रेरक कार्य रविवार को सिंगोली में देखने को मिला, जहां लसोड़ परिवार ने दिवंगत श्री मांगीलाल जी लसोड़ की अंतिम इच्छा और परिजनों की सहमति से मरणोपरांत नेत्रदान करवाकर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की।
कॉर्निया कलेक्शन के लिए अल सुबह निकली रोटरी टीम
स्व.मांगीलाल जी के देहावसान की सूचना मिलते ही रोटरी क्लब, नीमच की टीम सक्रिय हुई। टीम सुबह ठीक 5:00 बजे जिला मुख्यालय से रवाना होकर 90 किलोमीटर का सफर तय कर सिंगोली पहुंची। टीम में रोटेरियन सुरेश जैन मोड़ी, मुकेश कालरा, राजेश जायसवाल और विजय जैन गोल्डन शामिल थे।
गोमाबाई नेत्रालय, नीमच की तकनीकी टीम ने रोटरी क्लब नीमच के माध्यम से सिंगोली पहुंचकर नेत्र उत्सारण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह कॉर्निया अब दो नेत्रहीन लोगों के जीवन में नया उजाला लाएगा।
बेटों ने निभाई पिता की अंतिम इच्छा
स्व. मांगीलाल जी के सुपुत्र राजेशकुमार, निलेशकुमार और अरुणकुमार ने बताया कि उनके पिताजी बेहद धार्मिक और परोपकारी स्वभाव के थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही परिवार से यह इच्छा व्यक्त की थी कि मृत्यु के बाद उनकी आंखें किसी जरूरतमंद को दान कर दी जाएं। पिता के इस संकल्प को पूरा करने के लिए तीनों भाइयों ने बिना किसी देरी के तुरंत नेत्रदान की स्वीकृति दी।
"पिताजी शरीर से चले गए, पर उनकी आंखें अब दो लोगों की दुनिया देखेंगी। हमारे लिए और इस समाज के लिए उनके प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि है।"-लसोड़ परिवार
गोमाबाई नेत्रालय और रोटरी क्लब ने किया सम्मान
इस पुनीत और संवेदनशील कार्य के लिए रोटरी क्लब की टीम ने लसोड़ परिवार को प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया दिवंगत आत्मा के प्रति संवेदनाएं प्रकट की । संस्था ने शोक की इस घड़ी में भी परिवार द्वारा दिखाई गई उदारता, संवेदनशीलता और मानवता के प्रति समर्पण की जमकर सराहना की।