डेस्क न्यूज़
14 May, 2026
नीमच/जावद . 14 मई 2026 देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद अब पूरे प्रदेश में प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है। देवास हादसे की तथ्यात्मक पड़ताल और जानकारी के बाद, प्रदेश भर सहित नीमच में भी कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के सख्त निर्देशन में जिले भर के पटाखा गोदामों और दुकानों की आकस्मिक जांच की जा रही है।
जावद में प्रशासनिक कार्रवाई: सुरक्षा मानकों की पड़ताल
इसी कड़ी में आज, एसडीएम जावद प्रीति संघवी नाहर के नेतृत्व में अधिकारियों के एक दल ने ग्राम बरखेड़ा कामलिया और सुवाखेड़ा में सघन निरीक्षण किया।
बरखेड़ा कामलिया: यहाँ दिलीप राठी के तीन पटाखा गोदामों और दो दुकानों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मापदंड संतोषजनक पाए गए, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए एसडीएम ने मौके पर ही अग्निशमन यंत्रों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही, बिजली गुल होने की स्थिति में पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु विद्युत जनरेटर अनिवार्य रूप से लगाने को कहा गया।
सुवाखेड़ा: यहाँ अनिल चौरसिया के गोदाम का निरीक्षण हुआ। टीम ने कागजी दस्तावेजों और भौतिक स्टॉक का मिलान किया। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जल आपूर्ति के लिए पृथक नल और ऐसे संसाधन तैयार रखें जो दुर्घटना के समय तत्काल उपयोग में लाए जा सकें।
बड़ा सवाल: हादसों के बाद ही क्यों टूटती है कुंभकर्णी नींद?
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े हादसे के बाद प्रशासन सड़कों पर उतरा हो। पूर्व में हुए खंडवा हादसे और अब देवास की घटना, सिस्टम की लापरवाही की गवाही दे रहे हैं। जनता के बीच यह आक्रोश बढ़ रहा है सरकार और प्रशासन की और से भविष्य में हादसे ना हो इसको लेकर लगातार कर्तव्यबोध के साथ प्रयास जरुरी है.
सतत निगरानी का अभाव: आखिर क्यों प्रशासन नियमों का पालन कराने के लिए किसी बड़े विस्फोट का इंतजार करता है? क्या यह निरीक्षण साल भर एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होने चाहिए?
जिम्मेदारी तय हो: केवल छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई काफी नहीं है। देवास जैसे मामलों में जिला कलेक्टर, एसपी और संबंधित विभाग के उन अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जिनकी नाक के नीचे अवैध या असुरक्षित फैक्ट्रियां संचालित हो रही थीं।
नियमों की अनदेखी: प्रदेश के कई जिलों में आज भी रिहायशी इलाकों के पास पटाखा गोदाम मौजूद हैं, जहाँ न तो फायर एनओसी की जांच होती है और न ही स्टॉक लिमिट की।
देवास और खंडवा जैसे हादसों से सबक न लेना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक "निरीक्षण" की यह कवायद महज एक औपचारिक रस्म बनकर रह जाएगी। प्रशासन को जागने के लिए अब और कितनी जानों की आहुति चाहिए?