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विशेष रिपोर्ट: नीमच में स्मार्ट मीटर बना 'स्मार्ट' वसूली का नया हथियार ! मीटर जलने पर डेढ़ साल बाद गुपचुप बिल में जोड़ रहे मीटर की कीमत

डेस्क न्यूज़ 18 April, 2026

नीमच। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी एक ओर हाई-टेक 'स्मार्ट मीटर' के गुणगान गा रही है, वहीं दूसरी ओर इन मीटरों की आड़ में उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालने का खेल शुरू हो गया है ! नीमच शहर में बिजली कंपनी द्वारा 'CCB Adjustment' के नाम पर उपभोक्ताओं से मनमानी वसूली करने का मामला सामने आया है, जहाँ उपभोक्ताओं को बिना बताए, बिना नोटिस दिए और बिना किसी पारदर्शिता के उनके बिलों में ₹4300 जैसी बड़ी राशि थोपी जा रही है। माध्यम बनाया जा रहा है-'CCB Adjustment' को।

क्या है पूरा मामला?
नीमच के इंदिरा नगर निवासी उपभोक्ता जयंत सिंह के घर के बाहर कंपनी द्वारा लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व पूरी तरह दुरुस्त पुराना मीटर बदल कर स्मार्ट मीटर लगाया गया था। मीटर बदलने के कुछ ही दिनों बाद घर की लाइट बंद होने पर शिकायत दर्ज कराई तो मीटर जला हुआ पाए जाने पर कर्मचारियों ने तत्काल मीटर बदल दिया। उपभोक्ता को लगा कि समस्या हल हो गई, लेकिन असली झटका डेढ़ साल बाद अप्रैल 2026 के बिल में दिया गया । उपभोक्ता के बिल में बिना किसी पूर्व सूचना के CCB Adjustment के नाम पर ₹4300 की अतिरिक्त राशि जोड़ दी गई। जब उपभोक्ता ने अधिकारियों से संपर्क किया तो मौखिक रूप से बताया गया कि- "जो मीटर जला था, यह उसकी कीमत है।"

'द वॉचमैन पोस्ट' के सवालों पर अधिकारियों के पास जवाब नहीं, केवल मौखिक दावे
इस धांधली की तह तक जाने के लिए जब हमने कंपनी के AE महेश ठाकुर से सवाल किए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए और विभाग की पोल खुल गई:

गारंटी का खेल: AE महेश ठाकुर ने स्मार्ट मीटर बदले जाने की प्रक्रिया पूछे जाने पर स्वीकार किया कि स्मार्ट मीटर पर लगभग 2 वर्ष की गारंटी होती है। बावजूद इसके, महज कुछ दिन पुराने जले हुए मीटर की कीमत उपभोक्ता से क्यों वसूली जा रही है? इस सवाल पर अधिकारी निरुत्तर नजर आए। हालांकी AE महेश ठाकुर के बयान के उलट स्मार्ट मीटर पर ही ग्यारंटी पीरियड 10 वर्ष अंकित है।  नीमच में स्मार्ट मीटर लगाने की कवायद 2 वर्ष पहले ही शुरू हुई है ऐसे में शहर के सभी स्मार्ट मीटर फिलहाल ग्यारंटी पीरियड में ही होने चाहिए।      

पारदर्शिता का अभाव: AE महेश ठाकुर द्वारा दी गयी जानकारी अनुसार नियमतः मीटर जलने पर उपभोक्ता को नोटिस देना, मीटर की जांच करना और लेब टेस्ट रिपोर्ट साझा करना अनिवार्य है। लेकिन इस केस में न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही टेस्ट रिपोर्ट। अलबत्ता उपभोक्ता दवारा जब स्वयं कार्यालय में उपस्थित हो कर सवाल-जवाब किये गए तो उसे टेस्ट रिपोर्ट के नाम पर डेढ़ वर्ष बाद एक प्रिंटआउट पकड़ा दिया गया.  

जले हुए मीटरों का आंकड़ा कर रहा घोटाले की ओर इशारा : जानकारी मिली है कि शहर में अब तक लगभग 31 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 350 मीटर जलने की शिकायतें आ चुकी हैं। सवाल यह है कि क्या इन सभी उपभोक्ताओं से इसी तरह गुपचुप वसूली की जा रही है? इस तरह कम्पनी द्वारा शहर से आज दिनांक तक करीब 15 लाख रुपये की वसूली का इंतजाम कर लिया गया है, जो आगे भी निरंतर जारी रहने की संभावना है और एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।

उपभोक्ता के अधिकार और कंपनी की लापरवाही
इस पूरे घटनाक्रम में बिजली कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं के अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन किया जा रहा है. साथ ही मीटर बदलते वक्त या बिल में राशि जोड़ते वक्त उपभोक्ता को लिखित में कोई सूचना या जानकारी नहीं दी जा रही बल्कि कई महीनों बाद राशि चुकाने का फरमान सुनाया जा रहा  ।

उपभोक्ता क्यों भुगते कंपनी की सुविधा का खामियाजा? जबरन थोपा गया मीटर: पुराने बिजली मीटर सही चल रहे थे, लेकिन कंपनी ने 'अपनी सुविधा' और 'स्मार्टनेस' दिखाने के लिए जबरन स्मार्ट मीटर थोपे। मीटर घर के बाहर खंभों या दीवार पर कंपनी अपनी मर्जी से लगाती है। अब यदि धूप, बारिश या तकनीकी फाल्ट से मीटर जलता है, तो उसका आर्थिक बोझ उपभोक्ता की जेब पर डालना पूरी तरह अनुचित है।

'CCB Adjustment'- वसूली का नया मुखौटा?
हैरानी की बात यह है कि बिल में कहीं भी 'मीटर की कीमत' शब्द का उल्लेख नहीं है। क्या ₹4300 की यह राशि वाकई मीटर की वास्तविक सरकारी कीमत है? इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपभोक्ता के पास नहीं जिससे आशंका होती है कि 'CCB Adjustment' जैसे तकनीकी शब्द के पीछे इसलिए तो नहीं छिपाया जा रहा है।

विद्युत उपभोक्ता के अधिकार: क्या कहता है कानून?
बिजली नियामक आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी अतिरिक्त शुल्क को वसूलने से पहले उपभोक्ता को 'सुनवाई का अवसर' और 'लिखित नोटिस' देना अनिवार्य है। नीमच सहित प्रदेश में बिजली विभाग का यह रवैया न केवल तानाशाहीपूर्ण है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का सरेआम हनन है। स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध शहर पहले भी कर चुका है। अब गारंटी के बावजूद मीटर कि कीमत वसूलना और वो भी बिना किसी लिखित सूचना के, यह दर्शाता है कि विभाग अपनी वित्तीय कमियों को जनता को लूटकर पूरा कर रहा है।

द वॉचमैन पोस्ट के सवाल:
जब मीटर गारंटी पीरियड में है, तो उपभोक्ता से पैसा क्यों? इतना समय गुजर जाने के बाद बिना नोटिस और बिना टेस्ट रिपोर्ट साझा किए राशि वसूलना क्या अवैध वसूली की श्रेणी में नहीं आता? क्या बिजली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी केवल 'मौखिक' आदेशों पर विभाग चला रहे हैं? मीटर बदलते समय ‘मीटर की कीमत’ उपभोक्ता के साथ क्यों साझा नहीं की जा रही ? अधिकारी मीटर जलने पर कीमत वसूले जाने की पॉलिसी को क्यों लिखित में कहीं नहीं दर्शा पा रहे और CCB adjustment के नाम वसूली कर रहे हैं ?      

जाहीर है नीमच में स्मार्ट मीटर के नाम पर चल रहा यह खेल उपभोक्ताओं के साथ बड़ी धोखाधड़ी की ओर इशारा कर रहा है। यदि विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता नहीं लाई, तो यह जन-आक्रोश का बड़ा कारण बन सकता है।

यदि आप भी हैं बिजली विभाग के पीढ़ित तो जानकारी हमसे 9407117155 नंबर पर साझा करें।

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