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नीमच नपा की निष्ठुरता: हुडको कॉलोनी में खुदी पड़ी सड़कें, नुकीले पत्थरों पर नंगे पैर चलने को मजबूर जैन साध्वियां

डेस्क न्यूज़ 18 April, 2026

नीमच। नगर पालिका नीमच की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की कछुआ चाल अब न केवल आम जनता, बल्कि धार्मिक संतों के लिए भी भारी कष्ट का कारण बन रही है। शहर की हुडको कॉलोनी में पिछले तीन महीनों से मुख्य सड़क खुदी पड़ी है, जिससे उत्पन्न समस्याओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और रहवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

धार्मिक आस्था और संतों की पीड़ा
सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए नगर पालिका की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में पिछले एक माह से जैन साध्वियां विराजित हैं। जैन धर्म की परंपरा के अनुसार, साधु-साध्वियां नंगे पैर पदविहार करते हैं। सड़क पर बिखरे नुकीले कंकड़ और पत्थरों के बीच उन्हें मजबूरन चलना पड़ रहा है, जो अत्यंत कष्टदायक है।

गौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि नगर पालिका अध्यक्षा स्वयं जैन समाज से आती हैं, इसके बावजूद उनके कार्यकाल में जैन संतों को इस तरह की लापरवाही की सजा भुगतनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी साझा किया कि इस जर्जर सड़क की शिकायत करीब 11 माह पूर्व जून 2025 में सीएम हेल्पलाइन पर भी की गई थी, लेकिन प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

भ्रष्टाचार और राजनीति के आरोप
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता किशोर जेवरिया ने इस मामले में सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और ठेकेदारों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। जेवरिया ने कमेंट करते हुए कहा कि ठेकेदारों और सत्तापक्ष के बीच गहरी हिस्सेदारी है, जिसके कारण घटिया निर्माण और कार्यों में देरी आम बात हो गई है। उन्होंने नपा प्रशासन पर "बेशर्मी और लफ्फाजी" का आरोप लगाते हुए कहा कि इनके लिए जनता की परेशानी से बड़ा पैसा है।

आम जनजीवन अस्त-व्यस्त
सड़क खुदी होने के कारण पूरी हुडको कॉलोनी धूल और प्रदूषण की चपेट में है। मुख्य मार्ग अवरुद्ध होने से रहवासियों का निकलना दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नपा के जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं, जिसका खामियाजा अब नंगे पैर चलने वाले संतों को भी भुगतना पड़ रहा है।

अब देखना यह है कि सोशल मीडिया पर आक्रोश और बढ़ती शिकायतों के बाद क्या नीमच नगर पालिका नींद से जागती है या फिर हुडको कॉलोनी के रहवासी और संत इसी तरह पथरीली राहों पर चलने को विवश रहेंगे।

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